Sagar - डिजिटल अरेस्ट में खुरई की महिला अधिकारी गिरफ्तार, 75 वर्षीय बुजुर्ग से 44 लाख की ठगी
एमपी के खुरई से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सहोद्रा राय वार्ड में रहने वाली एक फाइनेंस कंपनी की महिला अधिकारी पर मुंबई के 75 वर्षीय बुजुर्ग से 44 लाख रुपये की ठगी में शामिल होने का आरोप है। इस हाई-प्रोफाइल डिजिटल अरेस्ट ठगी मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए महिला को गिरफ्तार कर लिया है।
जब मुंबई क्राइम ब्रांच की टीम महिला आरोपी को लेकर खुरई न्यायालय पहुंची, तो वहां मौजूद लोग हैरान रह गए। कोर्ट में पेशी के बाद आरोपी महिला को मुंबई ले जाया गया। हालांकि इस पूरे मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने आधिकारिक तौर पर मीडिया को विस्तृत जानकारी नहीं दी, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह पूरा मामला डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड से जुड़ा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, नवी मुंबई के पनवेल क्षेत्र में रहने वाले 75 वर्षीय सीनियर सिटीजन को 2 अक्टूबर को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराया गया था। खुद को जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर आरोपियों ने बुजुर्ग को मानसिक दबाव में रखा और अलग-अलग खातों में कुल 44 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। पीड़ित की शिकायत पर 6 नवंबर को नवी मुंबई पुलिस ने मामला दर्ज किया। जांच के दौरान मुंबई क्राइम ब्रांच को सुराग खुरई से जुड़े मिले। सीनियर इंस्पेक्टर दीपाली पाटिल के नेतृत्व में 5 सदस्यीय टीम खुरई पहुंची और सहोद्राबाई राय वार्ड निवासी जानकी विश्वकर्मा से पूछताछ की। इस दौरान उसका मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए।
जांच में सामने आया कि डिजिटल अरेस्ट गैंग द्वारा इस्तेमाल किया गया एक बैंक खाता खुरई के सागर नाका स्थित यूको बैंक में था। इस खाते में पीड़ित के 8 लाख रुपये आए थे, जिन्हें बाद में कई हिस्सों में गैंग के सरगना तक भेजा गया। पुलिस का कहना है कि यह एक बड़ा नेटवर्क है, जिसके तार मुंबई, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और सागर तक फैले हुए हैं। बताया जा रहा है कि आरोपी जानकी विश्वकर्मा सागर में पदस्थ एक फाइनेंस कंपनी में सेल्स मैनेजर है। डिजिटल अरेस्ट गैंग ने रकम ट्रांसफर से पहले उसका मोबाइल नंबर भी बदलवाया था, जिससे पुलिस को अहम सुराग मिले। फिलहाल मुंबई क्राइम ब्रांच इस पूरे नेटवर्क पर लगातार कार्रवाई कर रही है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना है।