निजी स्कूल और आंगनवाड़ी राम भरोसे, निरीक्षण में खुली पोल, शिक्षा व्यवस्था बेपटरी
सरकारी दावों और योजनाओं के बावजूद ग्रामीण अंचलों में शिक्षा व्यवस्था की हकीकत क्या है, इसकी तस्वीर एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले के पथरिया ब्लॉक के ग्राम बासाकला में सामने आई है। यहां नौनिहालों का भविष्य निजी स्कूलों और आंगनवाड़ियों के भरोसे छोड़ दिया गया है, जहां न बुनियादी सुविधाएं हैं और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। ग्राम बासाकला में संचालित सन साइन कॉन्वेंट स्कूल का औचक निरीक्षण उस वक्त हुआ, जब जनपद पंचायत अध्यक्ष खिलान अहिरवार, उपाध्यक्ष उदयभान पटेल, बीडीसी नीलेश सिंह ठाकुर, जनपद सीईओ के.के. पांडे और बीआरसी जिनेंद्र जैन मौके पर पहुंचे। निरीक्षण में जो तस्वीर सामने आई, उसने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
आठवीं कक्षा तक संचालित यह निजी स्कूल केवल तीन कमरों में चल रहा है। बच्चों के बैठने के लिए न तो पर्याप्त फर्नीचर है और न ही जमीन पर बिछाने के लिए चटाई। हैरानी की बात यह है कि इतनी अव्यवस्थाओं के बावजूद स्कूल प्रति छात्र करीब 4 हजार रुपये फीस वसूल रहा है। स्कूल की दीवारों पर न प्लास्टर है, न रंग-रोगन, फिर भी इसी वर्ष स्कूल की मान्यता नवीनीकृत कर दी गई। निरीक्षण के दौरान जनपद अध्यक्ष खिलान अहिरवार ने बीआरसी जिनेंद्र जैन से स्कूलों की नियमित जांच और मान्यता प्रक्रिया को लेकर सवाल किए, लेकिन वे संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इससे यह स्पष्ट हो गया कि कागजों में सब ठीक दिखाया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
स्कूल में केवल एक शौचालय और एक बाथरूम है, वह भी बिना दरवाजों के। शौचालय का गड्ढा पानी से भरा हुआ और खुला छोड़ा गया है, जिससे बच्चों के गिरने का खतरा बना हुआ है। यह स्थिति न सिर्फ अस्वच्छ है, बल्कि किसी बड़े हादसे को भी न्योता दे रही है। आठवीं तक की कक्षाओं का जिम्मा महज तीन शिक्षकों पर है। इनमें से एक शिक्षिका स्वयं बीए की पढ़ाई कर रही हैं। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल रही है, यह बड़ा सवाल बन गया है। निरीक्षण के बाद जनपद सीईओ के.के. पांडे ने कार्रवाई का भरोसा दिलाया, लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ आश्वासन से बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो पाएगा? बासाकला की यह तस्वीर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की बदहाली का आईना बन चुकी है, जहां सुधार की सख्त जरूरत है।