पानी कांड पहुंचा हाई कोर्ट! जनहित याचिकाओं पर सख्त रुख, मुफ्त इलाज के निर्देश
एमपी के इंदौर के बहुचर्चित भागीरथपुरा पानी कांड ने अब हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया है। इस गंभीर और संवेदनशील मामले को लेकर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं, जिन पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने शासन और प्रशासन को अहम निर्देश जारी किए हैं। हाई कोर्ट के रुख के बाद यह मामला अब और गंभीर होता नजर आ रहा है। दरअसल, भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की आपूर्ति के चलते बड़ी संख्या में लोग बीमार हो गए थे और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ था। इस पूरे प्रकरण को लेकर पहली जनहित याचिका हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईनाणी द्वारा दायर की गई है, जबकि दूसरी जनहित याचिका कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने दाखिल की है। दोनों याचिकाओं में इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और दोषियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की गई है।
याचिकाओं में यह भी मांग की गई है कि पानी कांड से प्रभावित सभी लोगों का निःशुल्क और समुचित इलाज कराया जाए। साथ ही जिन लोगों की जान गई है, उनके परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि पीड़ित परिवारों को कुछ राहत मिल सके। हाई कोर्ट ने दोनों जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी प्रभावित नागरिकों को उचित और निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए। न्यायालय ने शासन और प्रशासन से कहा है कि वे मृतकों की संख्या, बीमार लोगों के इलाज, अस्पतालों में की गई व्यवस्थाओं और अब तक उठाए गए कदमों से संबंधित पूरी जानकारी अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें।
कोर्ट ने इस मामले को बेहद गंभीर मानते हुए कहा कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। न्यायालय ने यह भी संकेत दिए हैं कि यदि रिपोर्ट संतोषजनक नहीं पाई गई, तो आगे और कड़े निर्देश दिए जा सकते हैं। इस मामले में अगली सुनवाई 2 जनवरी को तय की गई है। तब तक शासन और प्रशासन को अपनी विस्तृत रिपोर्ट हाई कोर्ट के समक्ष पेश करनी होगी। फिलहाल हाई कोर्ट की सख्ती के बाद पीड़ितों को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है।