पानी कांड पर सवाल, मंत्री के जवाब पर बवाल, पत्रकार से अपशब्दों ने खड़ा किया बखेड़ा
देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा रखने वाले इंदौर से एक बेहद शर्मनाक और संवेदनशील मामला सामने आया है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 12 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 162 से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इस दर्दनाक हादसे के बीच अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है, जिसने सियासी गलियारों से लेकर मीडिया जगत तक हलचल मचा दी है।
बुधवार शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इंदौर पहुंचे। उन्होंने अलग-अलग अस्पतालों में जाकर पीड़ितों और उनके परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में ऐसी कष्टदायक स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए ठोस और व्यापक इंतजाम किए जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि जैसे ही जांच रिपोर्ट सामने आएगी, जिम्मेदार बड़े अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लेकिन बैठक के बाद जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बाहर निकले, तो माहौल अचानक गरमा गया। पत्रकारों ने उनसे पीड़ितों के इलाज को लेकर सवाल पूछे। एक रिपोर्टर ने कहा कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजनों को इलाज में खर्च हुए पैसों का अब तक रिफंड नहीं मिला है। इस सवाल पर मंत्री विजयवर्गीय ने बेहद असंवेदनशील लहजे में कहा—“अरे छोड़ो यार, तुम फोकट सवाल मत पूछो।”
रिपोर्टर ने पलटकर जवाब दिया कि यह फोकट सवाल नहीं है, वह खुद पीड़ित परिवारों के बीच से आकर सवाल कर रहा है। इसी बात पर मंत्री विजयवर्गीय झल्ला गए और उन्होंने आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल कर दिया। मंत्री का यह व्यवहार कैमरे में कैद हो गया, जिसके बाद यह मामला तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
इस घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल उठने लगे कि क्या एक वरिष्ठ नेता और मंत्री से ऐसे शब्दों और ऐसे रवैये की उम्मीद की जा सकती है, खासकर तब, जब मामला लोगों की जान से जुड़ा हो। चौतरफा आलोचना के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट कर अपने शब्दों पर खेद जताया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—जब जनता और मीडिया जवाब मांग रहे हों, तब सत्ता में बैठे जिम्मेदार लोगों का रवैया क्या ऐसा होना चाहिए? भागीरथपुरा के पीड़ित आज भी न्याय, मुआवजे और जवाबदेही की राह देख रहे हैं।