आखिर कहां गई किसानों की खाद, बेचारा किसान ठंड में क्यों फिर रहा मारा-मारा !
सुबह-सुबह ठंड में आते हैं लाइनों में लगे रहते हैं एक दिन टोकन देते हैं 3 दिन बाद आने का कहा जाता है। और जिस दिन आते हैं तो ये लोग ताला डालकर भाग जाते हैं ये कहना है उस अन्नदाता का जो खाद के लिए परेशान है। यहां वहां भटकने के बाद भी खाद नसीब नहीं हो पा रहा है। इन्ही सब परेशानियों को लेकर किसानों के सब्र का बांध आखिर टूट गया और उन्होंने कलेक्ट्रेट के गेट के बाहर चक्काजाम कर दिया। अन्नदाताओं ने कालाबाजरी किये जाने के भी आरोप लगाए हैं। आपको नज़र आने वाली ये तस्वीरें एमपी के पन्ना जिले से सामने आई हैं। जहां किसानों का सिस्टम पर गुस्सा फूट पड़ा। किसान खाद दिए जाने की मांग कर रहे थे।
दरअसल पन्ना में अन्नदाता आज बेबस भी है और आक्रोशित भी, कड़ाके की इस ठंड में जहाँ लोग घर के बाहर निकलने से भी कतराते हैं। वहाँ जिले का किसान सुबह 4 बजे से खाद के लिए कतारों में खड़ा रहता है। लेकिन ये उसकी मजबूरी है कि किसानों की जेब में 22 दिसंबर के टोकन तो हैं, पर गोदामों में खाद का अकाल है।
जब्र किसानों के सब्र का बांध टूटा, तो गुस्सा ज्वालामुखी बनकर कलेक्ट्रेट की सड़क पर फूट पड़ा। सिस्टम ऐसा फ्रीज हुआ कि किसानों ने पन्ना-अजयगढ़ मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। घंटों तक सड़कों पर पहिए थमे रहे और अफसर बंद कमरों में समाधान खोजते रहे। किसानों का कहना है कि अगर टोकन बांट दिए थे, तो खाद कहाँ गायब हो गई?
किसानों का आरोप है की कई दिनों से खाद के।लिए भटक रहे हैं लेकिन प्रशासन ध्यान नहीं।दे रहा है।--------