CM मोहन यादव का बड़ा एक्शन, दूषित पानी से मौ-तों पर सख्ती, इंदौर निगम आयुक्त तत्काल हटाए गए
एमपी के इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल से उपजी गंभीर त्रासदी ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। सीएम ने इंदौर नगर निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया। यह कार्रवाई प्रदेशभर के प्रशासनिक अमले के लिए स्पष्ट संदेश मानी जा रही है कि जनता की जान से जुड़ी लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों के महापौरों और आयुक्तों के साथ एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक आयोजित की। बैठक के दौरान उन्होंने इंदौर में सामने आए दूषित पानी के मामले को गंभीर लापरवाही बताते हुए अधिकारियों को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। सीएम ने कहा,
“अगर आगे कहीं भी इस तरह की चूक हुई, तो जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। हमारी सरकार में जनता की जान से खिलवाड़ करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।”
इससे पहले भी राज्य सरकार ने लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई करते हुए नगर निगम के अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया और पीएचई विभाग के प्रभारी अधीक्षण यंत्री संजीव श्रीवास्तव को निलंबित कर दिया था, जबकि अपर आयुक्त को इंदौर से हटा दिया गया था। अब निगम आयुक्त को हटाया जाना इस मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
सीएम ने बैठक में पूरे प्रदेश की पेयजल व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के निर्देश दिए। उन्होंने सभी नगर निगमों को आदेश दिए कि पाइपलाइन, टंकी, फिल्टर प्लांट और जल स्रोतों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए। साथ ही समयबद्ध सुधार योजना तैयार कर उसे जमीन पर उतारने को कहा।
मुख्यमंत्री ने महापौरों और जनप्रतिनिधियों को भी सख्त निर्देश दिए कि वे प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर जनता की समस्याओं का तत्काल समाधान करें। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल और केवल जनहित और जनसुरक्षा है।
यह फैसला साफ संकेत देता है कि मध्यप्रदेश में अब लापरवाही नहीं, जवाबदेही चलेगी।