सागर- देश में पहली बार सागर से सड़क सुरक्षा की नई पहल, गांव-गांव गूंजा जीवन बचाने का संदेश
सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और जन-जागरूकता को जनआंदोलन बनाने की दिशा में सागर जिले ने देशभर में एक नई मिसाल कायम की है। देश में पहली बार सागर जिले में सड़क सुरक्षा के लिए विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया, जहां प्रशासन ने सीधे ग्रामीणों से संवाद कर जीवन की कीमत समझाई। इस अभिनव पहल की शुरुआत बमोरी बीका ग्राम से हुई, जहां कलेक्टर संदीप जी आर ने भावुक लेकिन सख्त शब्दों में कहा सड़क दुर्घटना में जब कोई व्यक्ति मरता है, तो उसके साथ पूरा परिवार टूट जाता है। आपकी एक छोटी सी गलती आपको हमेशा के लिए अपने परिवार से दूर कर सकती है।
कलेक्टर ने ग्राम सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह कोई सामान्य बैठक नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के जीवन से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकांश दुर्घटनाएं जल्दबाजी, नियमों की अनदेखी और लापरवाही के कारण होती हैं। हेलमेट, सीट बेल्ट, सही गति और सही समय पर वाहन चलाना ही जीवन की असली सुरक्षा है। उन्होंने शाम 6 से 9 और रात 2 से 5 बजे तक अनावश्यक वाहन चलाने से बचने की अपील की।
कलेक्टर ने सड़क निर्माण एजेंसियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि सभी निर्माण स्थलों पर बेरिकेडिंग और संकेतक अनिवार्य रूप से लगाए जाएं, ताकि दुर्घटनाओं की संभावना न रहे। साथ ही ग्रामीणों से अपील की गई कि नशे में वाहन न चलाएं, क्षमता से अधिक सवारी न बैठाएं और वाहन के साइड में बैग या सामान लटकाकर न रखें।
पुलिस अधीक्षक विकास शाहवाल ने कहा कि यह पहल सिर्फ चालान से डराने की नहीं, बल्कि जान बचाने की है। “चालान से ज्यादा जरूरी आपकी जिंदगी है। आपकी एक गलती आपके पूरे परिवार को बेसहारा बना सकती है।” उन्होंने दुर्घटना के समय वीडियो बनाने के बजाय घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाने पर जोर दिया और राहवीर योजना की जानकारी दी, जिसमें घायल को अस्पताल पहुंचाने वाले को 25 हजार रुपए की सम्मान राशि दी जाती है।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने दुर्घटना के बाद प्राथमिक उपचार और गोल्डन आवर के महत्व को समझाया। ग्रामवासियों को बुंदेली भाषा में सड़क सुरक्षा की शपथ दिलाई गई, सड़क सुरक्षा मित्रों को सम्मानित किया गया और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर रेडियम पट्टी लगाई गई। निशुल्क हेलमेट वितरण ने इस पहल को और प्रभावी बना दिया। सागर की यह विशेष ग्राम सभा अब केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जीवन बचाने का अभियान बन चुकी है।