सागर में जल सुरक्षा पर बड़ा एक्शन, महापौर का औचक निरीक्षण, कुएं-हैंडपंप का पानी पीने अयोग्य घोषित
सागर शहर में नागरिकों को सुरक्षित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नगर निगम ने जल गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। सोमवार को महापौर संगीता सुशील तिवारी ने नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री के साथ शहर के विभिन्न इलाकों में कुओं, हैंडपंपों, दुकानों और घरों में की जा रही पानी की गुणवत्ता जांच का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई महत्वपूर्ण और चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। निरीक्षण के दौरान बड़ा बाजार स्थित श्रीराम चौक के कुएं एवं हैंडपंप का पानी जांच में पीने योग्य नहीं पाया गया। इस पर महापौर ने तत्काल सख्त निर्देश देते हुए संबंधित स्थानों पर लाल रंग से “पानी पीने योग्य नहीं है” लिखने को कहा, ताकि आमजन किसी भी भ्रम में आकर इसका उपयोग न करें। महापौर ने स्पष्ट कहा कि नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर शीतला माता मंदिर क्षेत्र के कुएं, हैंडपंप और घरों के पानी की जांच में पानी पीने योग्य पाया गया, जिससे स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। निरीक्षण के दौरान एमआईसी सदस्य धर्मेंद्र खटीक, उपायुक्त एस.एस. बघेल, सहायक यंत्री संजय तिवारी, संकल्प फाउंडेशन के अध्यक्ष रिशांक तिवारी सहित जलप्रदाय शाखा के अधिकारी मौजूद रहे।
इधर नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने निगम क्षेत्र के सभी कुओं और हैंडपंपों के पानी की अनिवार्य गुणवत्ता जांच के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक वैज्ञानिक परीक्षण पूरी तरह नहीं हो जाते, तब तक कुओं और हैंडपंप के पानी को पेयजल के रूप में उपयोग न किया जाए। आयुक्त ने बताया कि राजघाट जलप्रदाय योजना के तहत टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड द्वारा घर-घर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की जा रही है, जिसकी नियमित जांच के बाद ही सप्लाई की जाती है।
इसके साथ ही निगमायुक्त के निर्देशानुसार नगर निगम क्षेत्र में जलापूर्ति प्रणाली, पाइपलाइन लीकेज, पेयजल गुणवत्ता और शिकायत निवारण के लिए कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। यह कंट्रोल रूम सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कार्य करेगा, जहां नागरिक पानी की गुणवत्ता या पाइपलाइन रिसाव से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। निगमायुक्त ने मनोज अग्रवाल, कार्यालय अधीक्षक मोबाइल नंबर 8982592659 को नोडल अधिकारी एवं राहुल रैकवार, उपयंत्री मोबाइल नंबर 7583894208 को सहायक नोडल अधिकारी नियुक्त किया है। नगर निगम का यह कदम इंदौर जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए सागर में जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की दिशा में एक बड़ा और सराहनीय प्रयास माना जा रहा है।