मौ-त का पानी बना सियासी आग, इंदौर हादसे पर प्रदेशभर में उबाल, कैलाश विजयवर्गीय के पुतले जले
एमपी के इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की जान जाने के बाद पूरा मध्यप्रदेश राजनीतिक उबाल की चपेट में आ गया है। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि सत्ता की संवेदनशीलता को लेकर भी तीखी बहस छेड़ दी है। प्रदेशभर में विपक्ष सड़कों पर उतर आया है और जगह-जगह विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल की आपूर्ति के चलते 16 लोगों के साथ एक 6 माह की मासूम बच्ची की जान चली गई। इस घटना से जनता में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पानी की गुणवत्ता पर ध्यान दिया गया होता, तो इतनी बड़ी त्रासदी को टाला जा सकता था। इस मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा है।
इसी कड़ी में खंडवा नाका चौराहे पर मध्यप्रदेश यूथ कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। यूथ कांग्रेस सचिव सन्नी गंवई के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का पुतला दहन किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इंदौर जैसे बड़े शहर में इतनी गंभीर लापरवाही होना सीधे तौर पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। प्रदर्शन के दौरान यूथ कांग्रेस नेताओं ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल मंत्री पद से इस्तीफा देने की मांग की। साथ ही इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव से भी इस्तीफे की मांग उठाई गई। नेताओं का कहना था कि जब जनता जहरीला पानी पीकर मर रही थी, तब जिम्मेदार लोग कुर्सियों से चिपके रहे और संवेदनशीलता दिखाने में नाकाम साबित हुए।
यूथ कांग्रेस सचिव सन्नी गंवई ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी जनहानि के बावजूद सत्ता पक्ष का रवैया बेहद असंवेदनशील है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है, जिसकी जिम्मेदारी तय होना चाहिए। प्रदेश में लगातार हो रहे प्रदर्शन यह साफ संकेत दे रहे हैं कि भागीरथपुरा कांड अब सिर्फ इंदौर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे मध्यप्रदेश की राजनीति को झकझोरने वाला मुद्दा बन चुका है। जनता का सवाल सीधा है—क्या मौतों की जवाबदेही तय होगी या यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा?