सागर में कड़ाके की ठंड का कहर, सर्द हवाओं से बढ़ी ठिठुरन,जाने अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम
सागर में कड़ाके की ठंड का कहर, सर्द हवाओं से बढ़ी ठिठुरन,जाने अगले तीन दिन कैसा रहेगा मौसम
सागर में उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं ने सागर में ठंड का प्रकोप और तेज कर दिया है। बीते तीन दिनों से शहर का न्यूनतम तापमान 9 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह ठिठुरन की चपेट में आ गया है। गुरुवार सुबह से ही शहर में हल्का कोहरा छाया रहा, जिससे सड़कों पर दृश्यता कम हो गई और लोगों को आवाजाही में परेशानी का सामना करना पड़ा। सुबह करीब 8 बजे धूप जरूर निकली, लेकिन सर्द हवाओं के आगे सूरज की तपिश भी बेअसर साबित हुई। मौसम विभाग के अनुसार, इस समय सागर का अधिकतम तापमान 23.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया गया। ठंड का असर इतना ज्यादा है कि लोग दिन में भी जैकेट, स्वेटर और शॉल में लिपटे नजर आ रहे हैं।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जनवरी माह में ठंड का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलता है। ठीक उसी तरह जैसे मानसून में जुलाई और अगस्त अहम होते हैं, वैसे ही दिसंबर और जनवरी में उत्तर भारत से आने वाली सर्द हवाएं पूरे मध्यप्रदेश में तापमान गिरा देती हैं। वर्तमान में हिमालय क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। इसके आगे बढ़ने पर बर्फ पिघलेगी और ठंडी हवाओं की रफ्तार बढ़ेगी, जिससे अगले 72 घंटों में ठंड और तेज होने की संभावना है। ठंड का सीधा असर खेती पर भी दिखाई देने लगा है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को पाले से फसलों को बचाने की सलाह दी है। उनका कहना है कि यदि तापमान 6 डिग्री से नीचे जाता है, तो खेत की मेड़ों पर सूखा और गीला कचरा जलाकर धुआं करें, जिससे खेत के आसपास का तापमान संतुलित रहता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, गेहूं की फसल में पीलेपन की समस्या होने पर एनपीके एक किलो और 300 ग्राम जिंक सल्फेट को 150 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव करना लाभकारी रहेगा। वहीं, धनिया और मसूर की फसल में माहू कीट दिखाई देने पर थायोमेथॉक्सिम या इमिडाक्लोप्रिड के छिड़काव की सलाह दी गई है। कुल मिलाकर, सागर में ठंड ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं और आने वाले दिनों में शीतलहर का असर और बढ़ने के संकेत हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और मौसम के अनुसार सावधानी बरतने की जरूरत है