सागर-ग्लूकोमा मरीजों के लिए बड़ी सौगात, IMA सागर अध्यक्ष ने BMC को दान किया अत्याधुनिक गोनियोस्कोप
सागर-ग्लूकोमा मरीजों के लिए बड़ी सौगात, IMA सागर अध्यक्ष ने BMC को दान किया अत्याधुनिक गोनियोस्कोप
बुंदेलखंड क्षेत्र में नेत्र रोगियों के लिए बेहतर इलाज की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन आईएमए सागर शाखा के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने सागर डिवीजन ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजिकल सोसाइटी द्वारा आयोजित सीएमई कार्यक्रम के दौरान बुंदेलखंड शासकीय मेडिकल कॉलेज, सागर के नेत्र रोग विभाग को एक अत्याधुनिक और उच्च गुणवत्ता वाला गोनियोस्कोप दान किया। इस महत्वपूर्ण दान से ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद) से पीड़ित मरीजों को अब और अधिक सटीक व प्रभावी उपचार मिल सकेगा। गोनियोस्कोप एक विशेष नेत्र परीक्षण उपकरण है, जिसका उपयोग गोनियोस्कोपी जांच में किया जाता है। यह उपकरण आंख के ड्रेनेज एंगल—कॉर्निया और आइरिस के बीच के हिस्से—का सूक्ष्म निरीक्षण करने में सहायक होता है। इसके माध्यम से नेत्र चिकित्सक यह आसानी से पहचान कर सकते हैं कि मरीज को ओपन-एंगल या क्लोज्ड-एंगल ग्लूकोमा है, जिससे सही समय पर सटीक उपचार योजना बनाना और रोग की नियमित निगरानी संभव हो पाती है।
इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. पी.एस. ठाकुर ने आईएमए सागर और डॉ. तल्हा साद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह दान कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की तकनीकी क्षमता को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि इस आधुनिक उपकरण की मदद से बुंदेलखंड क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भी निःशुल्क और विश्वस्तरीय नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। वहीं, डॉ. तल्हा साद ने कहा कि बुंदेलखंड जैसे क्षेत्र में भी हर मरीज को उच्च गुणवत्ता की चिकित्सा सेवाएं मिलना उसका अधिकार है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह छोटा-सा प्रयास आने वाले समय में हजारों मरीजों की आंखों की रोशनी बचाने में सहायक सिद्ध होगा। साथ ही उन्होंने भविष्य में मेडिकल कॉलेज के अन्य विभागों को भी आवश्यक चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने की योजना की जानकारी दी।
कार्यक्रम में आईएमए सागर के सचिव डॉ. रोशी जैन सहित डॉ. अशोक सिंघाई, डॉ. प्रवीण खरे, डॉ. अंजलि वीरानी, डॉ. सारिका चौहान और डॉ. उमेश पटेल जैसे वरिष्ठ चिकित्सक मौजूद रहे। सभी ने इस पहल को चिकित्सा सेवा और सामाजिक दायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। आईएमए सागर की यह पहल निश्चित रूप से क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगी और अन्य संगठनों व समाजसेवियों को भी ऐसे जनहितकारी कार्यों के लिए प्रेरित करेगी।