हजारों साल की ऐतिहासिक गौरवगाथा समेटे अजयगढ़ का किला, खजाने की कहानी, लेकिन अनदेखी का शिकार किला

 

बुंदेलखंड में वैसे तो कई प्राचीन इमारतें हैं जो आज बीबी आने आप में एक लंबा इतिहास समेटे हुए हैं। जिनमें से एक हैं एमपी के पन्ना में मौजूद अजयगढ़ का किला, जो अपने अलग इतिहास के लिए जाना जाता है।
लेकिन आज यह किला मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है। अजयगढ़ के किले जाने के लिए कोई पक्का रास्ता नहीं है। करीब 9 साल पहले रास्ता बनाने का काम भी शुरू हुआ लेकिन आधा अधूरा ही छूट गया। विंध्याचल पर्वतमाला की ऊँचाई पर स्थित यह किला चंदेल और गुप्त कालीन वैभव का प्रतीक है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अजयगढ़ किले का उल्लेख कर इसे भारत की गौरवशाली विरासत बताया था। बात पीएम तक पहुंच गई, उन्होंने ज़िक्र भी किया, लेकिन यह आज भी मूलभूत सुविधाओं, संरक्षण और सुरक्षा के लिए तरस क्यों रहा है। ये बाद सवाल है।

बता दें की अजयगढ़ की इस दुर्गम पहाड़ी में साल भर में एक बार मकर संक्रांति पर मेले का आयोजन होता है।जिसमें अजयपाल महाराज की दुर्लभ मूर्ति के दर्शन भक्तों को सिर्फ मेले के समय ही होते हैं। इसके बाद उनकी मूर्ति पुरातत्व संग्रहालय में साल भर के लिए रख दी जाती है। इस मेले और अजयपाल महाराज के दर्शन के लिए पूरे जिले समेत आसपास के जिलों के लाखों भक्त किले तक पहुंचते है।

 

 

 

 

पन्ना जिले में स्थित अजयगढ़ किले का इतिहास मुख्य रूप से चंदेल काल और गुप्त काल से जुड़ा हुआ है। 9वीं से 13वीं शताब्दी के बीच चंदेल शासकों द्वारा निर्मित यह किला उनकी शक्ति, कला और रणनीतिक कुशलता का प्रतीक माना जाता है। विंध्य पर्वतमाला की ऊँची चोटी पर अजयगढ़ की पहाड़ी पर बने इस दुर्ग को अजयपाल किला भी कहा जाता है। किले में कभी पाँच विशाल प्रवेश द्वार हुआ करते थे। जिनमें से अब केवल दो ही बाकी हैं। बाकी तीन धराशाई हो चुके हैं। किले के भीतर मजबूत पत्थरों से बनी दीवारें,अजयपाल का तालाब,गंगा और यमुना नाम की दो प्राचीन चट्टानी झीलें मौजूद हैं।

 

 

 

 

साथ ही अजयपाल महाराज का मंदिर और खजुराहो शैली के मंदिरों के अवशेष भी यहां देखे जा सकते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षण में होने के बावजूद किले की बारीक पत्थर कलाकृतियां आज उपेक्षा का शिकार हैं।
अजयगढ़ क्षेत्र के स्थानीय निवासियों और इतिहास प्रेमियों की सबसे बड़ी चिंता किले तक पहुँच और उसकी बदहाल स्थिति को लेकर है। आज भी अजयगढ़ किले तक जाने के लिए पक्के सड़क मार्ग का अभाव है।2016-17 में यहां कुछ दूरी तक सड़क निर्माण कार्य करवाया गया था। लेकिन वह भी पूरा नही हो सका।

 

 

 

 

बाद में पूर्व खनिज मंत्री बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने डीएमएफ फंड से करीब साढ़े छह करोड़ रुपये की राशि सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत की थी। टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी थी। लेकिन वन विभाग की एनओसी न मिलने के कारण सड़क निर्माण कार्य अटक गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक अगर किले तक सुविधाजनक रास्ता, सुरक्षा व्यवस्था और संरक्षण कार्य किए जाएँ तो यह स्थल पर्यटन का बड़ा केंद्र बन सकता है।

 

 

 

 

इसको लेकर पन्ना कलेक्टर ऊषा परमार से बात की गई तो उन्होंने बताया की मकर संक्रांति के बाद अजयपाल के किले के रास्ते के लिए प्रयास किए जाएंगे।

इसके अलावा स्थानीय लोगों में इस किले के खजाने को लेकर भी एक लोकचर्चा है कि किले के पत्थर में लिखा लेख और ताला चाबी की आकृति में किले के खजाने का राज छिपा है। लेकिन आज तक इस लेख को कोई पढ़ नही सका है। हालांकि कई बार खजाने को खोजने वालों ने नाकाम कोशिशें भी की। किले के रंगमहल के आसपास भी लोगों ने चोरी छुपे खुदाई की है।--------


By - sagar tv news
15-Jan-2026

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