बाघ की ऐसी दहशत की लोगों की नींदें उड़ गई, बंदूक के साये में खेतों में जाने मजबूर
बाघ की दहशत से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। लोग घरों से निकलने से भी कतरा रहे हैं। यही नहीं बंदूक के साये में खेती करने और खेतों तक जाने को मजबूर हैं तो कई किसान ऐसे भी हैं जो जान हथेली पर रखकर खेत तक पहुंच रहे हैं। तस्वीरें एमपी के विदिशा जिले से सामने आई हैं। जहां आसपास सटे गांवों में बाघ की दहशत ग्रामीणों में फैली हुई है। तो वहीं वन विभाग ने तेंदुए के मूवमेंट की पुष्टि की है।
सबसे ज्यादा भय ग्रामीणों को इस बात का सता रहा है की खेतों और गांव के आसपास टाइगर की मौजूदगी देखी गई है। जिससे किसान डरे सहमे हुए हैं। बंदूकों और लाठियों के साए में खेतों तक पहुंच रहे किसानों की ये तस्वीरें प्रशासन के लिए भी बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं। वन विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुए के मूवमेंट की पुष्टि की है। हालांकि वन विभाग अब पुलिस के साथ तालमेल बैठाकर इलाके की निगरानी और सुरक्षा का दावा कर रहा है।
रात में खेतों की तरफ किसान और मजदूरों ने जाना बंद कर दिया है। दिन भी किसान अपने खेत और मजदूरों की रखबाली बंदूक के साथ कर रहे हैं। डर के कारण अब किसान अकेले खेत जाने से कतरा रहे हैं। सुबह-सुबह और देर शाम खेतों में काम करना लगभग बंद हो गया है। महिलाएं और बुजुर्ग घरों में कैद होकर रह गए हैं। जबकि फसलों की सिंचाई और रखवाली पर असर पड़ रहा है।
किसान संजय राठी ने बताया की इलाके में बाघ दिखने की खबरों के बाद लोग डरे हुए हैं। खेतों की रखवाली करने बंदूक लेकर आये हैं।
बताया जा रहा है की खेतों की मेड़, नहर किनारे और जंगल से लगे इलाकों में जंगली जानवर के पैरों के निशान मिलने से दहशत और बढ़ गई है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि कुछ किसान लाइसेंसी बंदूक, टॉर्च और मशाल लेकर खेतों तक पहुंच रहे हैं। गांवों में रात के समय सामूहिक पहरा लगाया जा रहा है। कहीं ढोल-नगाड़े तो कहीं पटाखों की आवाज़ से टाइगर को भगाने की कोशिश हो रही है।
मामले में डीएफओ हेमंत यादव का कहना है की इलाके में टाइगर, तेंदुए समेत कई जंगली जानवरों का मूवमेंट जिले में पहले से रहा है। अभी जांच में तेंदुए के पगमार्क मिलने की संभावना जताई जा रही है। वन विभाग पुलिस के साथ मिलकर लगातार इलाके की जानकारी और निगरानी कर रहा है।-