धर्म परिवर्तन करने पर समाज ने तोड़े रिश्ते नाते, सामूहिक रूप से किया एलान !
धर्म परिवर्तन करने पर समाज ने तोड़े रिश्ते नाते, सामूहिक रूप से किया एलान !
ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवार से उसके अपने मुख्य समाज ने रिश्ते नाते तोड़ दिए हैं। एमपी के बालाघाट से सामने आए इस मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब डहरवाल कलार समाज का जिला स्तरीय सम्मेलन हुआ और इसमें निर्णय किया गया की धर्म परिवर्तन करने वाले परिवार से समाज का कोई भी व्यक्ति रिश्ता नहीं रखेगा।
बताया गया की डहरवाल कलार एक हिंदू समाज है। जिसने सनातन और समाज हित के उद्देश्य से ईसाई धर्म अपनाने वाले परिवारों से रिश्ता, नाता और संबंध नहीं रखने का फैसला लिया है। सनातन (हिंदू) धर्म में पंथ और धर्म हमारे समाज के भोले-भाले और गरीब भाई- बहन को निशाना बनाकर धर्म परिवर्तन करा रहे हैं, जो भाई- बहन अपनी संस्कार और संस्कृति को छोड़कर दूसरे पंथ और धर्म को अपनाते ही सभी देवी देवताओं की मूर्तियों को विसर्जित कर देते हैं ऐसे धर्म को हिन्दू धर्म होने का समाज दर्जा नहीं देता है समाज माफ़ नहीं करेगा। यह बात कलार समाज संगठन द्वारा आयोजित डहरवाल कलार वर्ग का जिला स्तरीय महासम्मेलन में समाज के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र साकरे ने जिले के खैरलांजी तहसील के चिखला बांध में हुए कार्यक्रम के दौरान कही।
बताया जा रहा है की डहरवाल कलार समाज में 13 दिसंबर 1999 को बालाघाट पहला सम्मेलन हुआ था। तब से लेकर कलार समाज के विकास के लिए सम्मेलन होते जा रहे हैं। इसी को लेकर आयोजित हुए सम्मेलन में समाज के वरिष्ठजनों को सम्मानित किया गया वहीं युवक युवतियों के परिचय सम्मेलन में बढ़-चढ़ कर युवा वर्ग ने हिस्सा लिया।
समाज के संगठन द्वारा हर साल एक विषय पर चर्चा की जाती है। पहले शादी समारोह में लग्न लगने का समय 11 बजे रात तक तय किया गया। फिर मृत्यु भोज पर सादा भोज करने का निर्णय लिया गया। वहीं इस बार समाज में चल रहे धर्मपरिवर्तन को लेकर मुद्दा, चर्चा और कुरीतियों को खत्म करने का उद्देश्य रखा गया।
डहरवाल कलार समाज जिलाध्यक्ष राजेन्द्र साकरे ने धर्म परिवर्तन को लेकर कहा कि यह केवल समाज को तोड़ना, परिवार में विवाद उत्पन करना है।