गोपाल भार्गव को परिजनों ने बताया मंत्री से बढ़कर, भोपाल का 74 बंगला B-1 बना मरीजों का सहारा
गोपाल भार्गव को परिजनों ने बताया मंत्री से बढ़कर, भोपाल का 74 बंगला B-1 बना मरीजों का सहारा
प्रदेश की राजनीति में सरकारी बंगलों को लेकर अक्सर विवाद और चर्चाएं सामने आती रहती हैं। कई बार पद से हटने के बाद भी बंगले खाली न करने को लेकर सवाल उठते हैं, लेकिन राजधानी भोपाल का 74 बंगला B-1 इन दिनों बिल्कुल अलग और सकारात्मक कारण से सुर्खियों में है। यह बंगला अब सत्ता या सुविधा का नहीं, बल्कि मानवता, सेवा और संवेदनशीलता का प्रतीक बन चुका है। एमपी के सागर जिले की रहली विधानसभा से विधायक और पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के इस बंगले को गंभीर हृदय रोग से पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों के लिए आश्रय गृह के रूप में विकसित किया गया है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से इलाज के लिए भोपाल आने वाले गरीब परिवारों को यहां न सिर्फ छत मिल रही है, बल्कि सम्मान, अपनापन और सहयोग भी मिल रहा है।
इलाज के दौरान बच्चों पर मानसिक दबाव न पड़े, इसके लिए बंगले में प्ले-स्कूल जैसी व्यवस्था की गई है। रंग-बिरंगे खिलौने, खेलने की जगह और देखरेख की सुविधा बच्चों को अस्पताल की गंभीरता से थोड़ी राहत देती है। वहीं, उनके माता-पिता और परिजनों के लिए सुरक्षित और व्यवस्थित ठहराव की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस सेवा का सबसे मानवीय पहलू है ‘गोपाल जी की रसोई’, जहां मरीजों और उनके परिजनों को दोनों समय का भोजन और नाश्ता पूरी तरह नि:शुल्क दिया जाता है। इलाज के खर्च से जूझ रहे परिवारों के लिए यह रसोई किसी वरदान से कम नहीं है।
74 बंगला B-1 में तीन बड़े हॉल को रेनोवेट कर 50 बिस्तरों की व्यवस्था की गई है। इसके साथ एम्बुलेंस सुविधा, अस्पताल आने-जाने में सहयोग, इलाज से जुड़े समन्वय के लिए कर्मचारी और अन्य मूलभूत सुविधाएं भी मौजूद हैं। परिजनों की जुबानी अपने पिता का इलाज कराने रहली से आए राजू विश्वकर्मा भावुक होकर कहते हैं— “गोपाल भार्गव जी मंत्री हों या न हों, हमारे लिए वे मंत्री से कहीं बढ़कर हैं। इस कठिन समय में उन्होंने हमें छत दी, भोजन दिया और सबसे बढ़कर भरोसा दिया। भोपाल का 74 बंगला B-1 आज यह साबित कर रहा है कि जब जनप्रतिनिधि चाहें, तो सत्ता का केंद्र सेवा का मंदिर भी बन सकता है।