Sagar-चकराघाट मेला : आस्था, परंपरा और आधुनिक सौंदर्य एक साथ, दोगुनी हुई रौनक और दुकानें
मकर संक्रांति के पावन अवसर पर लाखा बंजारा झील के किनारे स्थित चकराघाट पर लगा पारंपरिक मेला इस बार कई मायनों में खास बन गया। वर्षों बाद ऐसा दृश्य देखने को मिला, जब आस्था, परंपरा और आधुनिक सौंदर्य एक साथ नजर आए। झील के कायाकल्प और क्षेत्र के सौंदयींकरण के बाद बदला माहौल मेले की रौनक को कई गुना बढ़ाता दिखा। साफ-सुथरे घाट, पानी से लबालब झील, सजे-धजे मंदिर और व्यवस्थित रास्तों ने लोगों को आकर्षित किया। इसका असर यह रहा कि इस बार न सिर्फ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी, बल्कि दुकानों और व्यापार में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिला।
मेले की बढ़ती रौनक का सीधा फायदा दुकानदारों को मिल रहा है। पिछले 42 वर्षों से चकराघाट पर पानीपुरी की दुकान लगाने वाले दिनेश सोनी मुंडे बताते हैं कि पहले सीमित ग्राहकी होती थी, लेकिन अब भीड़ बढ़ने से उन्होंने मेन्यू भी बढ़ा दिया है। खानपान स्टॉल संचालक अंतु कहते हैं कि रोजाना बाजार में जितनी ग्राहकी होती है, उससे कहीं ज्यादा संक्रांति मेले में मिल रही है। मिट्टी की मूर्तियां और खिलौने बेचने वाले चंद्रभान प्रजापति ने निगम प्रशासन की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि साफ-सुथरी और खुली जगह मिलने से व्यापार करना आसान हो गया है।
अन्य दुकानदारों ने बताया कि पहले मेला सादा और छोटा होता था। शाम होते-होते दुकानें बंद हो जाती थीं। अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। झील के सौंदर्याकरण के बाद शीतला मंदिर, रामेश्वर महादेव मंदिर प्रांगण और कॉरिडोर क्षेत्र में तीन स्थानों पर मेला लग रहा है। पक्के घाट, बैठने की सुविधा और साफ पानी ने लोगों को यहां देर तक रुकने के लिए प्रेरित किया है। मकरोनिया, गोपालगंज, सदर सहित आसपास के क्षेत्रों से लोग दोपहिया और चारपहिया वाहनों से परिवार सहित मेला देखने आ रहे हैं। शाम के समय झील किनारे रोशनी में फोटो सेशन लोगों में खास आकर्षण बना हुआ है।