क्या सत्ता ही सिस्टम से हार गई, जिलाध्यक्ष की गुहार ने खोली प्रशासन की पोल !
ज़रा सोचिये की जिस पार्टी की सत्ता हो उसी पार्टी के एक जिलाध्यक्ष को सरकारी तंत्र से न्याय की गुहार लगानी पड़ रही हो तो आलम क्या होगा। धान उपार्जन केंद्रों में हो रही लूट की शिकायत करने एमपी के दमोह में भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे को खुद प्रशासन से गुहार लगानी पड़ी। वो खुद जनसुनवाई में शिकायत करने पहुंचे और वेयरहाउस में चल रही धांधली की शिकायत की, जी हाँ दमोह में सुशासन के दावों की हवा तब निकल गई।
जब भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम शिवहरे अपनी ही सरकार के तंत्र के खिलाफ जनसुनवाई में फरियादी बनकर जा खड़े हुए। जहाँ सांसद, चार विधायक और दो-दो मंत्री सत्ता पक्ष के हों, वहाँ संगठन के मुखिया का कतार में लगना यह साबित करता है कि जिले के धान उपार्जन केंद्रों पर लूट तंत्र हावी हो चुका है। और ये कहना गलत नहीं होगा की प्रशासनिक मशीनरी अब जनप्रतिनिधियों के भी नियंत्रण से बाहर है।
बताया गया की अभाना मंडल के अर्थखेड़ा समिति और गांधी वेयरहाउस में चल रही अवैध वसूली और किसानों के शोषण के खिलाफ जिलाध्यक्ष ने अपर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर दोषियों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है। वहीं दूसरी तरफ इस घटनाक्रम ने कांग्रेस को तीखा हमला करने का मौका दे दिया।
यह मामला जिले की प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा तमाचा है। सवाल यह है कि जब सत्ता में बैठे लोगों को ही सिस्टम से इस तरह न्याय माँगना पड़ रहा हो तो आम इंसान या किसान की बिसात ही क्या है।
अब देखने वाली बात होती है की जिलाध्यक्ष की इस गुहार को जिला प्रशासन कितना संज्ञान में लेता है। या फिर मामले को ठन्डे बस्ते में डाल दिया जाता है।