खड़ी फसल पर चला बुलडोजर, ग्रीनफील्ड हाईवे बना किसानों के लिए बर्बादी का रास्ता, खेत में बैठकर किया विरोध
एमपी के मुरैना से एक भावुक कर देने वाली तस्वीरें सामने आई हैं, जहां ग्रीनफील्ड हाईवे निर्माण के दौरान किसानों की खड़ी फसल पर बुलडोजर चल गया। खेतों में तैयार खड़ी फसल को मिट्टी में मिलते देख किसानों की आंखें भर आईं और कई किसान मौके पर ही फूट-फूटकर रो पड़े। गुस्साए किसानों ने बुलडोजर के सामने बैठकर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए निर्माण कार्य रुकवा दिया। किसानों का साफ कहना है—“यह विकास नहीं, बर्बादी का हाईवे है।”
जानकारी के अनुसार, आगरा से ग्वालियर की दूरी कम करने के उद्देश्य से ग्रीनफील्ड हाईवे का निर्माण तेजी से चल रहा है। इसी क्रम में निर्माण एजेंसी के कर्मचारी बुलडोजर लेकर खुर्द, करारी-भटारी और सिरमिति गांवों के आसपास पहुंचे। जैसे ही खुर्द और करारी-भटारी के बीच खेतों में मशीनें चलीं, आसपास के किसान एकजुट होकर मौके पर पहुंच गए और काम रोकने की मांग करने लगे।
किसानों का कहना है कि खेती ही उनके परिवार की आजीविका का एकमात्र सहारा है। जमीन और फसल छिनने का मतलब उनके घर का चूल्हा बुझना है। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने बताया कि मुआवजे के नाम पर नाममात्र की राशि दी जा रही है, जबकि खड़ी फसल के नुकसान का कोई ठोस भुगतान नहीं किया जा रहा। किसान सतीश बघेल ने आरोप लगाया कि एक बीघा फसल तैयार करने में करीब 40 हजार रुपये तक खर्च आता है, लेकिन फसल नष्ट होने के बदले मुआवजा शून्य है। ऐसे में नुकसान की भरपाई कैसे होगी?
किसानों ने लाउडस्पीकर के जरिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचाने की कोशिश की और अपील की कि खेती बचाइए, किसानों को उजाड़िए मत। किसानों ने साफ चेतावनी दी कि जब तक फसल का उचित मुआवजा और न्यायसंगत समाधान नहीं मिलेगा, तब तक वे निर्माण कार्य नहीं होने देंगे।
किसानों के बढ़ते विरोध और तनाव की स्थिति को देखते हुए निर्माण एजेंसी के कर्मचारी फिलहाल बुलडोजर लेकर मौके से लौट गए। हालांकि किसानों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। अब सवाल यही है—हाईवे बनेगा जरूर, लेकिन क्या किसानों की कीमत पर?