पानी ने ली बुजुर्ग की जान, शव रखकर चक्काजाम, प्रशासन के खिलाफ फूटा जनआक्रोश |SAGAR TV NEWS|
एमपी के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हो रही मौतों ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीती रात बद्रीप्रसाद लिटोरिया की संदिग्ध हालात में जान के बाद गुस्साए परिजनों और स्थानीय रहवासियों ने सुबह भागीरथपुरा पुल पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। देखते ही देखते यह प्रदर्शन उग्र हो गया और पुलिया पर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी शुरू हो गई। परिजनों का आरोप है कि बद्रीप्रसाद की जान दूषित पानी पीने से हुई है। इससे पहले इसी परिवार में बद्रीप्रसाद की बहु कंचन की भी इसी कारण जान जा चुकी है। परिवार का कहना है कि कंचन की जान के बाद भी न तो प्रशासन ने पानी की समस्या का समाधान किया और न ही किसी प्रकार की आर्थिक सहायता दी गई। लगातार हो रही अनदेखी से नाराज परिजन और क्षेत्रवासी सड़कों पर उतर आए।
सुबह से शुरू हुआ चक्काजाम कई घंटों तक चला, जिससे यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। सूचना मिलते ही एसडीएम, एसीपी, संबंधित थाना प्रभारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया। हालांकि परिजन और स्थानीय लोग दोषियों पर सख्त कार्रवाई, पीड़ित परिवार को मुआवजा और इलाके में शुद्ध पेयजल की तत्काल व्यवस्था की मांग पर अड़े रहे। प्रदर्शन में राजनीतिक रंग भी देखने को मिला। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे सहित कई कांग्रेस नेता मौके पर पहुंचे और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि दूषित पानी से मौतें होना बेहद गंभीर मामला है और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की बात कही।
काफी देर चले हंगामे के बाद एसडीएम ने सीएमएचओ से चर्चा कर जांच और उचित निराकरण का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन और प्रदर्शनकारी चक्काजाम हटाने को राजी हुए। फिलहाल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने और पानी के सैंपल जांचने की बात कही है। हालांकि, भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या कोई नई नहीं है। सवाल अब भी वही है—जब तक जानें जाती रहेंगी, क्या तब तक प्रशासन सिर्फ आश्वासन ही देता रहेगा? लोगों की मांग साफ है: शुद्ध पानी और जवाबदेही, ताकि किसी और परिवार को ऐसी कीमत न चुकानी पड़े।