अवैध खनन पर जेसीबी-हाइवा जब्ती पर बवाल, MLA के दबाव पर प्रशासन की कार्रवाई पर उठे सवाल
मंच से विवादित बोल बोतल न खरीदें, कलंक न लगे, सांसद के बयान पर बवाल
मुख्यमंत्री कन्या विवाह–निकाह योजना के तहत आयोजित सामूहिक विवाह समारोह उस वक्त चर्चा का केंद्र बन गया, जब एमपी के रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा के मंच से दिए गए बयान ने नई बहस छेड़ दी। बेटियों की विदाई और नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देने के लिए आयोजित इस गरिमामय कार्यक्रम में सांसद के शब्दों ने कई लोगों को असहज कर दिया। समारोह की खुशी भरी तस्वीर कुछ ही मिनटों में विवाद में बदल गई और अब यह मामला सोशल मीडिया पर भी खूब तूल पकड़ रहा है।
रीवा के मार्तंड क्रमांक–1 में आयोजित कार्यक्रम में सैकड़ों जोड़े विवाह बंधन में बंधे। मंच से संबोधित करते हुए सांसद जनार्दन मिश्रा ने योजना के तहत मिलने वाली सहायता राशि को लेकर सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस पैसे से गृहस्थी का जरूरी सामान खरीदा जाए और “बोतल खरीदने में पैसे बर्बाद न किए जाएं।” उनका इशारा शराब की ओर था, लेकिन कन्या विवाह जैसे पवित्र मंच से इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल लोगों को रास नहीं आया।
विवाद यहीं नहीं थमा। सांसद ने आगे कहा कि इस योजना से पिता की आंखों में आंसू आ जाते हैं क्योंकि उनकी बेटी “बिना कलंक लगे” ससुराल चली जाती है। ‘कलंक’ शब्द के प्रयोग ने नई बहस को जन्म दे दिया। सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या योजना से पहले बेटियों की विदाई को कलंक से जोड़ना उचित है? क्या एक जनप्रतिनिधि को ऐसे संवेदनशील मौके पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए?
सांसद के बयान का वीडियो वायरल होते ही प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। विपक्ष ने इसे महिलाओं के सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए हमला बोला, वहीं आम लोग भी बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बता रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे बयान सरकार की महिला सशक्तिकरण योजनाओं की भावना के विपरीत संदेश देते हैं।
गौरतलब है कि जनार्दन मिश्रा इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं। कभी लड़कियों के पहनावे, तो कभी शराब और सिगरेट जैसे मुद्दों पर उनकी टिप्पणी पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर चुकी है। फिलहाल, कन्या विवाह सम्मेलन में दिए गए इस बयान ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक मंचों से बोले गए शब्द कितनी बड़ी सियासी और सामाजिक हलचल पैदा कर सकते हैं।