प्रिंसिपल और टीचरों की ऐसी मेहनत की आप इस सरकारी स्कूल को देख यकीन नहीं करेंगे
मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के क्या हालात हैं अब यह बात तो किसी से छिपी नहीं है। आलम ये है की कहीं टीचर हैं तो बच्चों की कमी है कहीं बच्चे हैं। लेकिन टीचरों की कमी है। और स्कूलों की हालत की बात करें तो कई अनियमितताएं देखने को मिलती हैं। भवनों की दयनीय स्थिति है। लेकिन एमपी का एक सरकारी स्कूल ऐसा भी जिसे देखकर आप भी शायद यकीन न करें। इस देखकर आप भी कह उठे, स्कूल हो तो ऐसा...जी हाँ आपको नज़र आने वाला ये एक सरकारी स्कूल है। जो रायसेन जिले के आख़िरी छोर पर मौजूद है। जहाँ के टीचर बच्चों को लेकर इतने सजग हैं की न सिर्फ स्कूल परिसर बहुत बेहतर हालत में है बल्कि बच्चे भी काफी समझदार हैं। ये स्कूल है सरकारी हाई स्कूल बरखंदा जो देवरी तहसील में मौजूद है। अगर शिक्षा के मंदिर ऐसे ही हो तो क्या ही कहने हैं। आदिवासी अंचल के इस हाई स्कूल में 9 वी और दसवीं कक्षा में 84 छात्र छात्राएं है। स्कूल की प्रिंसिपल समेत सभी शिक्षक स्कूल को बेहतर बनाने मेहनत कर रहे है।
बरखन्दा के इस स्कूल को अगर मॉडल स्कूल कहा जाए तो गलत नहीं होगा। बिल्डिंग साफ सुधरी, चारों तरफ हरियाली, साथ ही सलीके से रखे जूते-चप्पल फूल-पौधे जिसे देख आप शायद बहुत ज्यादा यकीन भी न करें। लेकिन यही इस सरकारी स्कूल की खासियत है। यहां बच्चों की पढ़ाई के लिए डिजिटल टीवी समेत लायब्रेरी, साथ ही सांस्कृतिक बौद्धिक विकास, छात्राओं की सुरक्षा के अलावा बेहतर पढ़ाई पर ध्यान दिया जाता है। आदिवासी अंचल के 5 किलोमीटर के दायरे से बच्चे यहां पढ़ाई करने आते हैं। इस स्कूल का बीते साल 10 वी क्लास का 81 फीसदी रिजल्ट आया था। वहीं इस बार 100 फीसदी का लक्ष्य है। ये स्कूल और यहां के टीचर सभी के लिए मिसाल हैं। खासकर दूसरे सरकारी स्कूलों को सीख लेने की भी ज़रूरत है। यहां के सभी टीचर और बच्चे स्कूल को और भी बेहतर बनाने प्रयास कर रहे हैं। यह स्कूल मुख्य रूप से मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल के अंतर्गत आता है।
स्कूल की छत्राएं मिलेट्री और पुलिस जैसे विभागों में जाना चाहती है।
स्कूल प्राचार्या सुनीता शर्मा कहती हैं की सरकार ने हमे नौकरी दी। स्कूल हमारा मंदिर है इस स्कूल में पढ़ने बाले बच्चे आने बाले समय के देश का भविष्य हैं। जैसे हम घर को सुंदर बनाते हैं वैसे ही हमारे स्टाफ के लोग और हम इस स्कूल को सुंदर बना रहे है।