मुख्यमंत्री के गृह जिले में परेशान विधवा, न्याय के लिए 2 साल से लगा रही गुहार !
तारीख पर तारीख, तारीख पर तारीख ही मिल रही है साहब, लेकिन एक लाचार, मजबूर और दर-दर की ठोकरें खाने के बाद भी विधवा को आखिर इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। 60 साल की बुजुर्ग महिला न्याय की भीख मांगने के लिए सरकारी सिस्टम से गुहार लगा रही है लेकिन उसकी कहीं कोई सुनने वाला नहीं है। मामला कहीं और नहीं बल्कि मुख्यमंत्री के गृह जिले उज्जैन का है। दरसअल खाचरोद तहसील के बुरानाबाद की रहने वाली महिला का आरोप है की उसकी जमीन उसके देवर ने हथिया ली है। उसके पति की जान एक साल पहले जा चुकी है दो बेटियां थी उनकी शादी कर दी। जो कुछ भी था तो सिर्फ कुछ जमीन ही थी।
उसे ही जबरन छीन लिया गया। जिसे वापस पाने वह न्याय की गुहार लगा रही है। लेकिन भटकने के बाद भी इंसाफ नहीं मिल रहा है। उज्जैन जिले के बुरानाबाद की रहने वाली कमला बाई अब घर में अकेली रहती हैं किसी तरह गुजर बसर चल रहा है। वो जहां जिस कार्यालय जाती है वहां से मायूस ही लौटती है। अपने हाथों में दस्तावेज लिए बैठी महिला से पूछने पर उसने बताया की उसके पति का निधन एक साल पहले हो चुका है। घर में दो बेटियां थी उनकी शादी भी उन्होंने कर दी। उसकी पैतृक जमीन जो करीब तीन बीघा थी। उस पर उनके देवर ने कब्जा कर लिया। उन्हें उनके ही खेत में जाने नहीं दिया जा रहा। इसकी शिकायत कलेक्टर, एसपी ऑफिस, एसडीएम कार्यालय में भी की,गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उज्जैन कलेक्टर जन सुनवाई में भी गई। लेकिन भरोसे के सिवा कुछ नहीं मिला। जमीन के लिए तहसील कोर्ट में भी केस लड़ा।
केस जीत भी गई फिर भी प्रशाशन ने उसे उसका हक नहीं दिलवाया। आरोप है की गांव का पटवारी उन पर समझौते का दबाव बना रहा है जबकि उसका कहना है की जब जमीन उसकी है जिसके दस्तावेज भी मौजूद हैं। तो समझौता कैसा, कागज में भी उसका नाम है। कमला बाई का येभी आरोप है की उसका पैतृक घर भी देवर ने हथिया लिया। वह गांव के बाहर एक झोपड़ी में रह रही है। उसने गांव के पटवारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा की उनके हेराफेरी करने से देवर ने खेत में कब्जा किया है। देवर अपना रसूख बताकर उसे डरा धमका रहे हैं। जान से मारने की धमकी भी दी। जब एक बार खेत पहुंची तो मारपीट तक की गयी थी। जिसकी मेडिकल रिपोर्ट भी उसके पास है। कमला बाई के मुताबिक वह दो साल से अपने हक़ की लड़ रही है। बस इंसाफ नहीं मिल पा रहा है। बड़ा सवाल ये है की क्या मुख्य्मंत्री के गृह जिले में विधवा महिला को इंसाफ मिलेगा या वो इसी तरह परेशान होती रहेगी।