सागर जेल से 9 कैदियों की 14 साल बाद मिली रिहाई, कोई पढ़ाकू बना तो कोई पैसो की गड्डियां लेकर निकला
सागर सेंट्रल जेल से 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मौके पर 9 कैदियों को रिहाई मिली है यह सभी 302 के आरोप में सजा काट रहे थे, लेकिन जेल में सजा के दौरान बंदियों ने अलग अलग जेल में निरूद्ध रहने के दौरान उनके पुनर्वास के लिए उन्हें टेलरिंग, कारपेंटरी, लौहारी, भवन निर्माण मिस्त्री, प्रिंटिंग प्रेस, हथकरघा, बुनाई उद्योग आदि का काम भी सीखे और इनसे पैसा भी कमाया है, इनके द्वारा जो काम किया जाता है वह राशि अकाउंट में ट्रांसफर की जाती है वे चाहे तो इससे न्य काम शुरू कर ले या अपने अच्छे कोई दूसरे कार्यो में लगा दे,
सागर केंद्रीय जेल अधीक्षक मानेन्द्र सिंह परिहार ने रिहा होने वाले बंदियों से पुनः अपराध नहीं करने की अपील की है। साथ ही उनसे अपेक्षा की है कि वह जेल में रहने के दौरान जो कौशल और प्रशिक्षण अर्जित किया है, उसका उपयोग अपने परिवार की रोजी रोटी के लिए और अच्छे समाज के नव-निर्माण में सहभागी बनने के लिए करेंगे।
जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी रोने उर्फ रोहन पिता हरिराम आदिवासी, श्यामलाल पिता झम्मू आदिवासी, ध्रुव सिंह पिता परमलाल लोधी, लक्ष्मण पिता बन्दू रजक, रज्जन उर्फ राजकुमार पिता मन्नूलाल रैकवार, मस्ताना उर्फ गोविन्द पिता मुन्ना रैकवार, कालका पिता बैजनाथ कुशवाहा, पल्टू उर्फ परसराम पिता चूरामन पटैल, राजेन्द्र पिता भारत सिंह लोधी को गणतंत्र दिवस के मौके पर सोमवार को रिहा किया गया है,
पूर्व में गणतंत्र दिवस, अम्बेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती पर बंदी रिहा किए जाते थे। लेकिन अब राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस (15) नवंबर) को भी आजीवन कारावास से दंडित बंदियों को पात्रतानुसार रिहा किया जाएगा।