एमपी में आफत बनी बारिश-ओलावृष्टि, खेतों में बिछी सफेद चादर, कई जिलों में फसलें चौपट, किसान बेहाल
मध्यप्रदेश में मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदली कि किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। कड़ाके की सर्दी के बीच आंधी-तूफान, तेज बारिश और ओलावृष्टि ने प्रदेश के कई जिलों में कहर बरपा दिया है। देवास, शाजापुर, आगर मालवा, उज्जैन, खंडवा, भिंड, मुरैना, ग्वालियर, सागर, बुरहानपुर और रीवा समेत अनेक जिलों में ओले गिरने से खेतों में खड़ी रबी फसलों को नुकसान की आशंका गहरा गई है।
शाजापुर जिले में हालात सबसे ज्यादा चिंताजनक नजर आए। जोयरी हाईवे और आसपास के इलाकों में इतने बड़े-बड़े ओले गिरे कि सड़कें बर्फ की सफेद चादर में तब्दील हो गईं। कई गांवों में गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई, जिससे किसानों की उम्मीदें टूटती दिखीं। देवास जिले के हाटपीपल्या और आसपास के गांवों में तेज आंधी के साथ हुई ओलावृष्टि से गेहूं, प्याज और लहसुन की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
उज्जैन जिले की तराना, घट्टिया और महिदपुर तहसील में भी ओलों की मार से किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। कई जगह आधे घंटे तक चली ओलावृष्टि ने तैयार फसलें तबाह कर दीं। आगर मालवा के कानड़ क्षेत्र में खेतों में ओलों की मोटी परत जम गई, जिससे गेहूं, चना और सरसों की फसलों पर संकट मंडरा रहा है।
बुरहानपुर और खंडवा में तेज बारिश और आंधी से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। मकानों के टीन शेड उड़ गए, बिजली आपूर्ति बाधित रही और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। ग्वालियर-चंबल अंचल में बारिश के साथ कोहरे ने मुश्किलें बढ़ा दीं, वहीं भिंड में मावठे की बारिश को कुछ किसानों ने फसलों के लिए राहत भी बताया।
मौसम विभाग ने आगामी 24 घंटों में भी कई जिलों में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी जारी की है। ऐसे में अन्नदाता किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं और सरकार से सर्वे व मुआवजे की उम्मीद कर रहे हैं।