आधी रात ओलावृष्टि से चना-मसूर तबाह, किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
एमपी के सागर संभाग के दमोह जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है। जिले की पायरा ग्राम पंचायत में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात अचानक बदले मौसम ने ऐसा कहर बरपाया कि खेतों में खड़ी फसलें देखते ही देखते तबाह हो गईं। रात करीब 1 बजकर 15 मिनट पर तेज बारिश के साथ भारी ओलावृष्टि शुरू हुई, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। अचानक हुई इस प्राकृतिक आपदा के कारण किसान अपनी फसलें बचाने का कोई इंतजाम नहीं कर सके। खेतों में मेहनत से तैयार की गई चना, मसूर और बटरी जैसी रबी फसलें ओलों की मार से जमीन पर बिछ गईं। किसानों के मुताबिक कई खेतों में फसलें कटाई के बिल्कुल करीब थीं, ऐसे में हुआ नुकसान उनकी आर्थिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकता है।
सुबह होते ही जब किसान अपने खेतों में पहुंचे, तो हर तरफ बर्बादी का मंजर नजर आया। ओलों से टूटी फसलें, गीले खेत और झुकी हुई बालियां देखकर किसानों की आंखें नम हो गईं। कई किसानों ने बताया कि इस साल पहले ही लागत बढ़ चुकी थी, अब फसल खराब होने से कर्ज चुकाना भी मुश्किल हो जाएगा। हालांकि मौसम विभाग ने जिले में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी पहले ही जारी की थी, लेकिन आधी रात को अचानक आई इस आपदा ने किसानों को पूरी तरह असहाय बना दिया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर ओलावृष्टि कुछ मिनट और जारी रहती, तो नुकसान और भी ज्यादा हो सकता था।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल फसल नुकसान का सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा दिया जाए। साथ ही फसल बीमा योजना के तहत नुकसान का सही आकलन कर बीमा क्लेम जल्द दिलाने की भी मांग की जा रही है। वहीं मौसम विभाग ने आगामी दिनों में भी मौसम के अस्थिर बने रहने की संभावना जताई है और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। फिलहाल पायरा ग्राम पंचायत सहित आसपास के गांवों के किसान सरकार और प्रशासन की ओर टकटकी लगाए बैठे हैं, ताकि उन्हें इस प्राकृतिक आपदा से उबरने के लिए कुछ राहत मिल सके।