Sagar-जिंदा को मार दिया, मरे को जिंदा कर दिया ! शाहगढ़ में सिस्टम की चौंकाने वाली कारस्तानी
सागर जिले की शाहगढ़ तहसील से सामने आए दो मामले न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल भी खड़ा करते हैं। यहां सरकारी कागजों में कहीं जिंदा इंसान को मृत घोषित कर दिया गया, तो कहीं वर्षों पहले मर चुके व्यक्ति को जिंदा दिखाकर उसकी जमीन का बंटवारा कर दिया गया।
पहला मामला शाहगढ़ तहसील के ग्राम दतया का है, जहां धर्मी बाई पटेल को वर्ष 1997 में सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया। हैरानी इस बात की है कि धर्मी बाई आज भी जीवित हैं, लेकिन कागजों में उन्हें कब्र में पहुंचा दिया गया। इसके बाद उनकी जमीन का नामांतरण धर्मी यादव के नाम कर दिया गया और यहीं कहानी खत्म नहीं हुई। उसी जमीन की फौती उठाकर बाद में गांव के ही एक यादव परिवार के नाम दर्ज कर दी गई। सवाल उठता है कि बिना व्यक्ति की वास्तविक मृत्यु के फौती कैसे हो गई और किसकी सहमति से?
दूसरा मामला भी शाहगढ़ तहसील से जुड़ा है। वर्ष 2004 में मृत्यु हो चुकी नथुआ यादव को सरकारी रिकॉर्ड में जिंदा दिखाया गया और उनकी जमीन का बाकायदा बंटवारा कर दिया गया। और हैरत की बात यह कि दोनों मामलों में जमीन का अंतिम लाभ एक ही नाम पर जाकर ठहरता है—प्रेम बाई यादव।
पीड़ित ग्रामीण जब सागर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे तो उन्होंने गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि ग्राम में पदस्थ रहे तत्कालीन पटवारी सुनील अहिरवार ने धर्मी बाई पटेल को मृत दर्शाते हुए फर्जी पंचनामा तैयार किया और उनका नाम राजस्व रिकॉर्ड से हटा दिया। करीब एक एकड़ जमीन सीधे प्रेम बाई यादव के नाम दर्ज कर दी गई। वहीं दूसरे मामले में आरोप है कि पटवारी प्रमोद यादव ने वर्ष 2024 में मृत नथुआ यादव के फर्जी हस्ताक्षर कर उनकी जमीन का बंटवारा कर दिया।
पीड़ितों का कहना है कि वे वर्षों से दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन न्याय आज भी फाइलों में दबा पड़ा है। इस पूरे मामले पर शाहगढ़ एसडीएम नवीन ठाकुर का कहना है कि प्रकरण उनके संज्ञान में आया है। जांच कराई जा रही है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।