बारिश-आंधी की मार और फिर तहसीलदार के बयान से भड़के किसान, फसल नुकसान पर सियासी संग्राम
एमपी के खंडवा जिले में बीती रात हुई तेज बारिश और आंधी ने किसानों की उम्मीदों पर एक बार फिर पानी फेर दिया। रबी सीजन की मुख्य फसल गेहूं को व्यापक नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी फसलें आड़ी होकर जमीन पर गिर गईं, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। खास बात यह है कि खरीफ सीजन में सोयाबीन की फसल में नुकसान झेल चुके किसान चार महीने के भीतर दूसरी बड़ी प्राकृतिक आपदा से जूझते नजर आ रहे हैं।
तहसीलदार का बयान बना विवाद की जड़ इसी बीच किल्लौद तहसीलदार धनाजी गढ़वाल का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने किसानों के आक्रोश को और तेज कर दिया। तहसीलदार का कहना है कि “खेतों में आड़ी हुई फसलें धूप और हवा लगने से दोबारा खड़ी हो जाती हैं, इसलिए थोड़ा इंतजार जरूरी है, उसके बाद ही सर्वे कराया जाएगा।” किसानों ने इस बयान को असंवेदनशील बताते हुए कहा कि इससे उनके नुकसान को कम करके दिखाने की कोशिश हो रही है।
फसल नुकसान की सूचना पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह किल्लौद ब्लॉक के प्रभावित गांवों में पहुंचे। इसी दौरान मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने किसानों और कांग्रेस नेताओं के सामने वही तर्क दोहराया। इस पर जिलाध्यक्ष ने कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि प्रशासन को कागजी तर्क नहीं, जमीनी सच्चाई देखनी चाहिए।तहसीलदार ने सफाई देते हुए कहा कि वे स्वयं 15 एकड़ के काश्तकार हैं और अनुभव से कह रहे हैं कि कई बार फसलें दोबारा खड़ी हो जाती हैं।
हालांकि किसानों का कहना है कि मौजूदा हालात में नमी, हवा और जमीन की स्थिति अलग है, जिससे गेहूं की फसल को स्थायी नुकसान हुआ है। उत्तम पाल सिंह ने गड़बड़ी, हरिपुरा, सेमरूढ़, लछौड़ा, जूनापानी, खेड़ीपुरा, घाघरिया, मालुद, बड़गांव, कुंडिया, बिल्लोद, पाटाखाली और भुलवानी सहित एक दर्जन से अधिक गांवों का दौरा किया। उन्होंने कहा कि अधिकांश खेतों में फसल जमीन पर पड़ी है और उत्पादन घटने की पूरी आशंका है।
सरकार और प्रशासन पर उठे सवाल तहसीलदार के बयान के बाद विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों का कहना है कि यदि शुरुआती स्तर पर ही नुकसान को हल्का दिखाया गया, तो मुआवजा और बीमा क्लेम प्रभावित होंगे। सोशल मीडिया पर भी प्रशासनिक रवैये को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुल मिलाकर, बारिश-आंधी से हुए फसल नुकसान और प्रशासनिक बयान ने खंडवा में माहौल गरमा दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन कब निष्पक्ष सर्वे कराकर किसानों को राहत देता है।