मतदाता सूची से 43 लाख नाम कटने का आरोप,पूर्व मंत्री का चुनाव आयोग पर हमला, बोले लोकतंत्र से खिलवाड़
मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मतदाता सूची को लेकर घमासान तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी पीसीसी कार्यालय में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। वर्मा ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के नाम पर बड़े पैमाने पर भेदभाव किया जा रहा है और करीब 43 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे जा चुके हैं,
जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है। सज्जन सिंह वर्मा ने दावा किया कि मध्य प्रदेश सहित देश के 12 राज्यों में SIR की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन इसकी पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि BLO एक ही दिन में 40-50 फॉर्म भरवा रहे हैं, जो निर्वाचन आयोग के नियमों का खुला उल्लंघन है। वर्मा ने कहा कि एक ही नाम की प्रिंटेड मतदाता सूची भाजपा कार्यकर्ताओं को दी गई, जिससे पूरी प्रक्रिया संदिग्ध हो जाती है।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग के मतदाताओं के नाम सबसे ज्यादा काटे गए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास पूरी मतदाता सूची उपलब्ध है, जबकि निर्वाचन आयोग से जब 1 लाख 45 हजार नामों की सूची मांगी गई, तो आयोग ने केवल संख्या बताई, नाम उपलब्ध नहीं कराए। वर्मा ने इसे जानबूझकर की जा रही गोपनीयता करार दिया।
सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि कई जगह BLO मतदाताओं के सामने ही आपत्तियों के फॉर्म भरवा रहे हैं और भाजपा से जुड़े चिन्हों वाले प्रिंटेड फॉर्म और दुपट्टों के जरिए मिलीभगत की जा रही है। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी सही मतदाता का नाम कटना असंवैधानिक है और यह सीधे-सीधे मताधिकार का हनन है।
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि हर बूथ पर उसके कार्यकर्ता नजर रखे हुए हैं और इस पूरे मामले को लेकर निर्वाचन आयोग से औपचारिक शिकायत की जाएगी। साथ ही प्रदेश निर्वाचन कार्यालय के दो अधिकारियों पर FIR दर्ज करने की मांग भी की गई है। सज्जन सिंह वर्मा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यह प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो कांग्रेस लोकतंत्र की रक्षा के लिए सड़क से अदालत तक संघर्ष करेगी।