सागर जिले का वो शहीद, जो तिरंगा लिए 17 साल में ही देश पर हो गया था कुर्बान
सागर जिले में एक ऐसा शख्स भी शहीद हुआ था, जिनकी उम्र महज 17 साल ही थी। और थाने में तिरंगा झंडा फहराने के दौरान उन्हें अंग्रेजों ने गोली मार दी, जिससे वह हाथों में तिरंगा लिए ही देश पर कुर्बान हो गए थे। यह बात सन 1942 की है जहां सागर के गढ़ाकोटा में साबूलाल जैन शहीद हुए थे। आज भी उन्हें याद करते हुए नमन किया जाता है साथ ही उनका किस्सा भी सुनाया जाता है।
दरअसल सागर के गढ़ाकोटा में शुक्रवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि बलिदान दिवस पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। जहां नदीपार स्थित अमर शहीद साबूलाल के स्मारक पर नगर के गणमान्यों और शिक्षकों ने उन्हें श्रृद्धांजलि दी। इस दौरान बच्चों ने देश भक्ति से ओतप्रोत कार्यक्रम किए। साथ ही साबूलाल उच्चतर माध्यमिक स्कूल के बच्चों को प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार वितरण किया गया। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि मनोज तिवारी ने बच्चों के साथ मध्यान्ह भोजन भी किया।
इस मौके पर राष्ट्रपति से पुरूस्कृत रिटायर्ड शिक्षक पी एल पटेल ने अमर शहीद साबूलाल की जीवन गाथा सुनाते हुये बताया की उनका जन्म 5 सितंबर 1923 को सुभाष वार्ड गढ़ाकोटा में सुक्के जैन के यहां हुआ था। 9 अगस्त 1942 को जब पूरे भारत देश में गांधी जी के द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था। उसी को लेकर गढाकोटा में भी कार्यक्रम की तैयारियां जोरो से चल रही थी। नगर के मुख्य बाजार में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एकट्ठे हो रहे थे और उन्होंने थाने में झंडा फहराने निर्णय लिया था। देखते-देखते करीब डेढ़ हजार लोग इकट्ठा हो गए। सभी जुलूस लेकर नदी पार स्थित थाना परिसर पहुंचे।
जहां थानेदार गयाप्रसाद ड्यूटी पर थे. उन्होंने भीड़भाड़ को देख लाठीचार्ज कर दिया, लोग बुरी तरह घायल हो गए। इसी बीच साबूलाल जी हाथ में तिरंगा झंडा लेकर थाने में फहराने पहुंचे, तो उन्हें गोली मार दी गई, वह तिरंगा लिए जमीन पर गिर पड़े और 17 साल में ही शहीद हो गये। इस घटनाक्रम में करीब 19 सत्याग्रहियों को जेल भी जाना था गोली लगने वालों में अमर शहीद साबूलाल जैन, धनीराम दुबे, कुंजीलाल नामदेव भी शामिल थे। कार्यक्रम के आखिर में बिगुल बजते ही सभी ने अमर शहीद साबूलाल जी को अपने श्रृद्धासुमन अर्पित किये। इस दौरान कई लोगों की मजूदगी रही।