Sagar - रुद्राक्ष धाम में श्री राम कथा शुरू, प्राण प्रतिष्ठा के साथ आज से हनुमान जी के दर्शन, CM भी आ सकते
Sagar - रुद्राक्ष धाम में श्री राम कथा शुरू, प्राण प्रतिष्ठा के साथ आज से हनुमान जी के दर्शन, CM भी आ सकते
सागर के रुद्राक्ष धाम, बामोरा में हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर श्रीराम कथा भी आरंभ हो गई है। राष्ट्रीय कथा वाचक प्रेमभूषण महाराज ने पहले दिन शिव-विवाह प्रसंग से कथा का शुभारंभ किया। 1 फरवरी, रविवार को वे भगवान श्रीराम के जन्म उत्सव की कथा सुनाएंगे।
पूर्व मंत्री एवं खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने कहा कि जब तक भारत में रामकथा जीवित है, तब तक भारतीय संस्कृति सुरक्षित है। कथा सुनने से हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, क्योंकि जहां-जहां रामकथा होती है, वहां हनुमान जी अदृश्य रूप से उपस्थित रहते हैं। श्रीराम कथा भारतीय संस्कृति की आत्मा है, जो पीढ़ियों को जोड़ती है और ‘राष्ट्र-चरित्र’ का आधार है।
पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु श्रीराम कथा सुनने के लिए कथा पंडाल पहुंचे। वहीं रविवार को हनुमान जी की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न होगी। यहां काले पत्थर से निर्मित हनुमान जी की पाषाण प्रतिमा विराजमान की गई है। श्रद्धालुओं के लिए दोपहर 12:00 बजे से दर्शन प्रारंभ हो जाएंगे।
लोक-प्रसिद्ध कथा वाचक पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने मध्यप्रदेश के पूर्व गृहमंत्री एवं खुरई विधायक श्री भूपेंद्र सिंह के संकल्प से आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा के दौरान कहा कि यदि श्रद्धा और विश्वास नहीं है तो कुछ भी प्राप्त नहीं होता। जैसे संशय-स्वरूपा माता सती श्रीराम कथा सुनने गईं, लेकिन कथा उनके हृदय तक नहीं पहुंची। जिसकी जितनी दृढ़ श्रद्धा होती है, उसे उतना ही भगवद् फल प्राप्त होता है। यदि श्रद्धा में अर्पण और समर्पण हो, तो वह अवश्य फल देती है।
उन्होंने आगे कहा कि हम जिस युग में जी रहे हैं, उसमें कोई भी मनुष्य विकारों से पूरी तरह मुक्त
नहीं रह पाता। कामनाओं के कारण मन में अनेक विकार उत्पन्न होते रहते हैं, जिससे जीवन कष्टमय हो जाता है। यदि हम सहज जीवन जीना चाहते हैं, तो कलियुग के इस मैल को धोने का एकमात्र साधन श्रीराम कथा है। काम, क्रोध, लोभ, मद और मत्सर जैसे विकार ही कलिमल कहलाते हैं। इनसे बचने का सबसे सरल उपाय श्रीराम कथा है। तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में कहा है कि जो इस कथा को सुनता, कहता और गाता है, वह सभी प्रकार के सुख प्राप्त करता हुआ अंत में प्रभु श्रीराम के धाम को प्राप्त करता है।
पूज्य महाराज जी ने यह भी कहा कि यदि हमारे माता-पिता जीवित हैं, तो वे ही हमारे साक्षात् भगवान हैं। माता-पिता की सेवा करके हम वह सब प्राप्त कर सकते हैं, जो हम ईश्वर से चाहते हैं। श्रीरामचरितमानस में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि जो माता-पिता, गुरु और अपने से बड़ों की आज्ञा का पालन करता है, वह सदैव सुखी रहता है।