Sagar- मंत्री बोले श्रवण कुमार की तरह हर बुजुर्ग को तीर्थ, आस्था की रेल में कामाख्या देवी गए श्रद्धालु
आस्था, भक्ति और सरकारी संवेदनशीलता का अनोखा संगम बुधवार को सागर रेलवे स्टेशन पर देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत 279 श्रद्धालुओं से भरी विशेष ट्रेन कामाख्या देवी के लिए रवाना हुई। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा कर शुभकामनाओं के साथ ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। स्टेशन परिसर ‘जय माता दी’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। मंत्री राजपूत ने भावुक अंदाज में कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आधुनिक युग के श्रवण कुमार की तरह प्रदेश के हर बुजुर्ग को तीर्थ दर्शन करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज की व्यस्त जिंदगी में बुजुर्गों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है, जो न केवल उन्हें आध्यात्मिक शांति देती है, बल्कि समाज में सम्मान और आत्मसम्मान भी बढ़ाती है।
उन्होंने विस्तार से बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना के तहत 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और 60 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगजनों को भारत के किसी एक प्रमुख तीर्थ स्थल की निःशुल्क यात्रा कराई जाती है। यात्रा के दौरान विशेष ट्रेन, भोजन, वस्त्र, स्थानीय परिवहन, गाइड और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सरकार की ओर से की जाती हैं ताकि किसी भी यात्री को असुविधा न हो। मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि प्रदेश सरकार लाड़ली लक्ष्मी, लाड़ली बहना, पीएम किसान सम्मान निधि, पीएम आवास और कन्यादान जैसी योजनाओं के जरिए समाज के हर वर्ग को लाभान्वित कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे।
इस अवसर पर सागर विधायक शैलेंद्र जैन ने सभी यात्रियों को मंगल यात्रा की शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह योजना बुजुर्गों के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह भरती है। यात्रियों ने मुख्यमंत्री और मंत्री श्री राजपूत का आभार व्यक्त किया। मंत्री राजपूत ने श्रद्धालुओं से कहा कि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर वे सीधे उनसे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ने हर स्तर पर पर्याप्त इंतजाम किए हैं। कार्यक्रम में सैकड़ों गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कुल मिलाकर, यह क्षण सिर्फ ट्रेन रवाना होने का नहीं, बल्कि बुजुर्गों के सपनों को पंख देने का भी था—जहां सरकार, समाज और आस्था एक साथ खड़े नजर आए।