Sagar-रुद्राक्ष धाम में दक्षिणमुखी हनुमान जी के दर्शन शुरू,काले पत्थर की अलौकिक मूर्ति
सागर के रुद्राक्ष धाम बामोरा में सात दिन से नवनिर्मित श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी की अलौकिक मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम पूरे विधि विधान से संपन्न हो गया है, इस दौरान संत रविशंकर महाराज रावतपुरा सरकार की उपस्थिति में संपन्न हुआ, मंदिर के शिखर पर क्रेन के द्वारा धर्म ध्वजा स्थापित की गई। पूज्य पं प्रेमभूषण महाराज जी रावतपुरा सरकार जी, मुख्य यजमान पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेन्द्र सिंह ने परिजनों ने हनुमान जी मंदिर के दर्शन किए। इस प्रकार सभी श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ हनुमान जी मंदिर खोल दिया गया, पहले ही दिवस हजारों की संख्या में भक्तों ने दर्शन किए
श्रीराम कथा आयोजन के द्वितीय दिवस हनुमानजी के परमभक्त पूज्य रावतपुरा सरकार जी स्वयं कथा श्रवण करने मंच पर विराजमान रहे। उन्होंने व्यासपीठ को प्रणाम किया। कथावाचक पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने उनका अभिनंदन करते हुए कहा कि यह दूसरा कथा आयोजन है जिसमें ऐसा सुअवसर आया है जब रावतपुरा सरकार जी उनकी कथा सुनने पधारे हैं।
सप्त दिवसीय श्री राम कथा का गायन के दूसरे सत्र में पूज्य प्रेमभूषण जी महाराज ने व्यासपीठ से कथा वाचन करते हुए व्यक्त किए सत्संग तो अपने घर से ही प्रारंभ होना चाहिए। जैसे मां भगवती ने प्रश्न किया और भोले बाबा ने पूरी राम कथा सुना दी। सत्संग का अर्थ होता है सत्य का संग। जिस घर में सत्संग का प्रवेश हो जाता है सत्संग का वातावरण बन जाता है वह घर अपने आप मंदिर के रूप में परिवर्तित हो जाता है। सत्संग मनुष्य को भटकने से बचा लेता है।
प्रेमभूषण जी महाराज ने विधायक भूपेन्द्र सिंह के पावन संकल्प से आयोजित रामकथा गायन के क्रम में कहा कि जो आपके लिए सत्संग का अवसर पैदा कर दे, आपको कथा में पहुंचा दे आपको तीर्थ में जाने का अवसर प्रदान कर दे, उसका भरपूर आदर करना चाहिए। सत्संग का अवसर देने के लिए भोले बाबा ने मां भगवती की भी खूब प्रशंसा की थी। उन्होंने कहा कि श्री राम कथा मनुष्य को सुखी जीवन के मार्ग और साधन प्रदान करती है। इस कलिकाल में राम कथा मनुष्य को पाप से बचाने के लिए कलमषी वृक्षों को काटने के लिए कुल्हाड़ी का कार्य करती है। कथा श्रवण करने वाला भटकने से बच जाता है और सत्कर्म में उसकी गति हो जाती है।