लीला साहू की जिद ने बनवा दी सड़क, बगैहा टोला में शुरू हुआ निर्माण, वायरल वीडियो से विकास तक…
कभी कीचड़, गड्ढों और बदहाली की पहचान रही सड़क… आज मशीनों की गड़गड़ाहट और नई उम्मीदों की गवाह बन चुकी है। एमपी के सीधी जिले के बगैहा टोला में आखिरकार वह सड़क बननी शुरू हो गई है, जिसके लिए स्थानीय इनफ्लुएंसर और ग्रामीण महिला लीला साहू पिछले दो साल से लगातार संघर्ष कर रही थीं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्माण कार्य शुरू होते ही लीला साहू ने खुद वीडियो जारी कर अपनी खुशी जाहिर की—और यह खुशी सिर्फ उनकी नहीं, पूरे गांव की है।
यह कहानी सिर्फ सड़क बनने की नहीं, बल्कि एक साधारण महिला की असाधारण लड़ाई की है। रामपुर नैकिन विकासखंड के खड्डी खुर्द के बगैहा टोला से गजरी को जोड़ने वाला रास्ता वर्षों से बदहाल था। बरसात में कीचड़, गर्मियों में धूल और पूरे साल जोखिम—यही इस सड़क की पहचान थी। लीला साहू ने दो साल तक प्रशासन से लेकर सत्ता के शीर्ष तक गुहार लगाई। उन्होंने सीधी कलेक्टर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह और सांसद राजेश मिश्रा तक अपनी मांग पहुंचाई, लेकिन जब सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने सोशल मीडिया को अपना हथियार बनाया।
सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब लीला साहू ने अपनी गर्भावस्था के दौरान टूटी सड़क पर चलते हुए वीडियो बनाया। यह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया। उसमें उन्होंने सिर्फ अपनी परेशानी नहीं दिखाई, बल्कि गांव की छह अन्य गर्भवती महिलाओं की दुश्वारियां भी सामने रखीं। उन्होंने बताया कि खराब सड़क के कारण एंबुलेंस तक गांव नहीं पहुंच पाती थी।
इस वीडियो ने प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों की किरकिरी करा दी। वीडियो वायरल होने के बाद चुरहट विधायक अजय सिंह राहुल ने तत्काल सड़क की अस्थायी मरम्मत कराई थी, जिसके लिए लीला साहू ने सार्वजनिक रूप से उनका आभार जताया था। लेकिन लीला यहीं नहीं रुकीं—उनका लक्ष्य स्थायी सड़क था। आखिरकार अब प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत पक्की सड़क का निर्माण शुरू हो गया है।
निर्माण कार्य शुरू होते ही लीला साहू ने फिर एक वीडियो जारी किया, जिसमें वह मिट्टी कटाई और मशीनों को काम करते दिखाती नजर आईं। उनकी आवाज में संतोष था, लेकिन साथ ही यह संदेश भी—“अगर आवाज उठाओ तो बदलाव संभव है।” स्थानीय ग्रामीण इसे बड़ी सौगात मान रहे हैं। आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र के इस गांव के लिए यह सड़क सिर्फ विकास नहीं, बल्कि सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य का रास्ता है। लीला साहू ने साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और सही मंच मिल जाए तो एक आम महिला भी व्यवस्था को बदल सकती है।