सारा शहर सो रहा था तभी गरजे बुलडोजर, मजार के अवैध अतिक्रमण को किया जमींदोज
सुबह-सुबह नगर निगम परिसर में अचानक बुलडोजरों की आवाज गरज उठी। भारी पुलिस बल और तीन थानों की पुलिस की मौजूदगी में एक मजार के पास कार्यवाई को अंजाम दिया गया। जहां अवैध हिस्से को टीम ने जमींदोज कर दिया। कार्यवाई एमपी के उज्जैन में की गयी। नगर निगम परिसर स्थित नजर अली मिल कम्पाउंड में बनी मजार के आस पास सालों से काबिज अवैध कब्जे को निगम की टीम ने मलबे में तब्दील कर दिया। मजार का अवैध हिस्सा जमींदोज करने की यह कार्रवाई इतनी गोपनीय और तेज थी कि जब तक शहर जागता, तब तक तीन जेसीबी मशीनों ने अवैध बाउंड्री वॉल, टीन शेड और फेंसिंग को साफ कर दिया था। इस पूरी कार्रवाई के दौरान इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था ताकि कोई विरोध न पनप सके।
मामले में सैटेलाइट व्यू भी सामने आया है। जिसमें करीब 25 साल पहले सम्बंधित जगह पर कुछ भी न होने और फिर साल दर साल यहां किस तरह से अतिक्रमण किया गया उसे दर्शाया गया है।
नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर ने जानकारी देते हुए बताया की मजार के आसपास सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण किया गया था। इस संबंध में निगम द्वारा पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन तय समय-सीमा बीतने के बाद भी कब्जा नहीं हटाया गया। जिसके बाद तीन जेसीबी, कटर मशीनों की मदद से अतिक्रमण हटाया गया।
सीएसपी राहुल देशमुख ने बताया कि सुरक्षा के लिहाज से तीन थानों के टीआई समेत 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। कार्रवाई के दौरान मजार के बाहर बने अवैध शेड और दीवार को तोड़ने के साथ ही रास्ते में बाधा बन रहे करीब एक दर्जन पेड़ों को भी हटाया गया।
मामले में हिन्दू जागरण मंच मालवा प्रांत कार्यकारिणी सदस्य अर्जुन भदौरिया का कहना है की नगर निगम के पास उपलब्ध सरकारी खसरा और बी-1 के दस्तावेजों में इस मजार या किसी भी अन्य निर्माण का कोई उल्लेख नहीं है। उनका दावा है की सन 2000 से पहले के सैटेलाइट फुटेज साफ बताते हैं कि वहां उस समय कोई मजार या निर्माण अस्तित्व में नहीं था।
इसके अलावा कमेटी के मोहम्मद गुफरान ने इस कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा की यह मजार करीब 150 साल पुरानी है। यहां सभी धर्मों के लोग आते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि निगम ने खुद यहां फेंसिंग करके दी थी।