मजदूर का 72 घंटे का डिजिटल अरेस्ट, NIA बनकर ठगों ने उड़ा दिए 1.43 लाख, पुलिस की फुर्ती से बचे बाकी पैसे
मध्प्रदेश के राजधानी भोपाल में साइबर ठगों ने एक गरीब मजदूर को अपने जाल में फंसाकर पूरे 72 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर रखा। खुद को एनआईए अधिकारी बताने वाले ठगों ने आतंकवादी फंडिंग के झूठे आरोप में डराकर उससे 1 लाख 43 हजार रुपए ऐंठ लिए। हालांकि पुलिस की सक्रियता से बाकी रकम ठगों के हाथ लगने से बच गई। यह मामला छोला मंदिर थाना क्षेत्र का है, जिसने एक बार फिर डिजिटल ठगी के नए खतरनाक तरीकों को उजागर कर दिया है।
छोला मंदिर इलाके में रहने वाले 45 वर्षीय मजदूर राजकुमार के पास एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को NIA का अधिकारी बताया और दावा किया कि राजकुमार के खाते से आतंकियों को फंडिंग की गई है। जेल जाने के डर से राजकुमार पूरी तरह सहम गया। ठगों ने उसे लगातार वीडियो कॉल पर रहने और कमरे से बाहर न निकलने का आदेश दिया। इस तरह वह 72 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रहा।
इसके बाद ठगों ने केस सेटलमेंट के नाम पर 3 लाख रुपए की मांग की। डरे-सहमे राजकुमार ने अपनी जमा-पूंजी में से 1 लाख 43 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। लेकिन जब ठगों ने और पैसे का दबाव बनाया, तो उसे शक हुआ। उसने परिवार को पूरी बात बताई और पुलिस से मदद ली। छोला मंदिर थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तकनीकी सर्विलांस की मदद ली और बैंक से संपर्क कर खातों को होल्ड करवाया। हालांकि ठग कुछ रकम निकाल चुके थे, लेकिन बाकी पैसे बचा लिए गए।
राजकुमार पीड़ित ने बताया कि उन्होंने मुझे इतना डरा दिया था कि मुझे लगा सच में जेल हो जाएगी… पुलिस ने समय पर मदद की। थाना प्रभारी सरस्वती तिवारी ने कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी कभी वीडियो कॉल पर पूछताछ नहीं करती और न ही पैसे मांगती है। अगर कोई डराए या धमकाए तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या नजदीकी थाने पहुंचे। नागरिक सतर्क रहें, डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं होती। संदेह होने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें।