समय पर पहुंचा फिर भी लौटा दिया गया, SDM ने लेट का हवाला देकर छात्र को परीक्षा देने से रोका
बोर्ड परीक्षा के दौरान प्रशासनिक सख्ती और मानवीय संवेदनशीलता के बीच टकराव का एक मामला एमपी के दतिया जिले के भांडेर ब्लॉक से सामने आया है, जहां एक छात्र को महज कुछ मिनट देर होने के कारण परीक्षा देने से रोक दिया गया। परिजनों की बार-बार गुहार और छात्र की सफाई के बावजूद एसडीएम नहीं पसीजे और छात्र को बैरंग लौटा दिया गया। इस घटना ने पूरे इलाके में सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला सरसई परीक्षा केंद्र का है। छात्र अनमोल दतिया से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित इस केंद्र पर निर्धारित प्रवेश समय के अनुसार ही पहुंचने की कोशिश कर रहा था, लेकिन दूरी और रास्ते की वजह से वह तय समय से थोड़ा देर से पहुंचा। छात्र का कहना है कि वह पेपर बंटने से पहले ही परीक्षा केंद्र पर मौजूद था, लेकिन बावजूद इसके उसे अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब अनमोल गेट पर पहुंचा तो परीक्षा शुरू होने में अभी समय था और पेपर भी नहीं बंटे थे। इसके बावजूद ड्यूटी पर मौजूद एसडीएम ने “लेट आने” का हवाला देते हुए उसे प्रवेश देने से साफ इनकार कर दिया। छात्र और उसके परिजनों ने हाथ जोड़कर विनती की, लेकिन प्रशासन का रुख सख्त बना रहा। परिजनों का कहना है कि उनका बेटा जानबूझकर देर से नहीं आया था, बल्कि दूरी और यातायात के कारण कुछ मिनट लेट हो गया था। उन्होंने कहा कि अगर छात्र पेपर शुरू होने से पहले पहुंच गया था तो उसे मौका दिया जाना चाहिए था। वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने नियमों के नाम पर छात्र के भविष्य के साथ कठोरता दिखाई है।
इस घटना के बाद परीक्षा केंद्र के बाहर काफी देर तक तनाव का माहौल रहा। परिजन रोते-बिलखते दिखे और कई लोगों ने प्रशासन के फैसले पर नाराजगी जताई। छात्र अनमोल भी बेहद निराश नजर आया, क्योंकि उसकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया। प्रशासन की ओर से फिलहाल इस मामले में कोई विस्तृत बयान नहीं आया है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि परीक्षा के नियम सभी के लिए समान होते हैं और समय का पालन करना अनिवार्य है। अब सवाल यह उठता है कि क्या कुछ मिनट की देरी के लिए एक छात्र का पूरा साल दांव पर लगाना सही था? यह मामला नियम बनाम मानवीय संवेदना की बहस को फिर से हवा दे रहा है।