सागर- मोबाइल, एनीमिया और अवसाद, युवा बालिकाओं के स्वास्थ्य पर बढ़ता संकट- आईएमए सागर व एनएसएस की बड़ी पहल
तेजी से बदलती जीवनशैली, डिजिटल निर्भरता और पोषण की कमी के बीच युवा बालिकाओं का स्वास्थ्य गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। इसी चिंता को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) सागर और गर्ल्स डिग्री कॉलेज, सागर के एनएसएस इकाई ने नई गर्ल्स डिग्री कॉलेज परिसर, पथरिया में “युवा बालिकाओं के स्वास्थ्य जागरूकता एवं प्रबंधन” पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किया।
यह कार्यक्रम ग्राम सुवतला स्वास्थ्य केंद्र के सहयोग से संचालित हुआ, जिसमें सैकड़ों छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मोबाइल की लत, एनीमिया, मासिक धर्म विकार और मानसिक स्वास्थ्य जैसे ज्वलंत मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। आईएमए अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने बताया कि अत्यधिक मोबाइल उपयोग से ड्राई आई सिंड्रोम, अनिद्रा और मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने छात्राओं को 20-20-20 नियम, नीली रोशनी फिल्टर, सीमित स्क्रीन टाइम और नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाने की सलाह दी।
एनीमिया पर बात करते हुए डॉ. साद ने बताया कि भारत में 50–60 प्रतिशत किशोरियां इससे प्रभावित हैं। उन्होंने हरी सब्जियां, दालें, फल, विटामिन-सी युक्त आहार और गुड़ को दैनिक भोजन में शामिल करने पर जोर दिया। साथ ही ‘एनीमिया मुक्त भारत’ के तहत आयरन-फोलिक एसिड गोली और नियमित डीवॉर्मिंग की आवश्यकता बताई। मासिक धर्म स्वास्थ्य पर उन्होंने खुली चर्चा को बढ़ावा देने की अपील की।
उन्होंने बताया कि अत्यधिक रक्तस्राव, दर्द और अनियमित चक्र पढ़ाई और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। उन्होंने स्वच्छता, नियमित पैड बदलने, गर्म पानी की थैली और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श की सलाह दी। साथ ही मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS) के तहत सस्ते पैड की जानकारी दी।
मानसिक स्वास्थ्य पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया दबाव, शैक्षणिक तनाव और भेदभाव चिंता व अवसाद बढ़ा रहे हैं। उन्होंने RKSK के तहत किशोर-अनुकूल स्वास्थ्य क्लीनिक (AFHC) में गोपनीय परामर्श लेने की सलाह दी। कार्यक्रम की सफलता में प्राचार्य डॉ. आनंद तिवारी, एनएसएस संयोजक डॉ. सरिता जैन, डॉ. आकर्षा तिवारी और डॉ. अर्चना मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।