Sagar- निर्मला सप्रे दलबदल केस में स्पीकर की अग्निपरीक्षा, अलग-अलग बैठकें, 27 को हाईकोर्ट में सुनवाई
सागर जिले की बीना विधायक निर्मला सप्रे के कथित दलबदल मामले में सियासी पारा फिर चढ़ गया है। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने मंगलवार को इस मामले में अहम पहल करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और बीना विधायक निर्मला सप्रे से अलग-अलग बैठकें कीं। यह बैठक ऐसे समय हुई है, जब 27 फरवरी को इस मामले में मप्र हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। दरअसल, कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे पर भाजपा के मंच पर शपथ लेने और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप हैं।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस संबंध में याचिका दायर की थी, जिस पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की डबल बेंच ने सुनवाई की थी। कोर्ट में राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल ने कहा था कि मामला फिलहाल विधानसभा अध्यक्ष के पास विचाराधीन है और इस पर सक्रिय रूप से काम चल रहा है।
15 जनवरी को हाईकोर्ट ने सरकार के इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए कोई अंतिम आदेश नहीं दिया और अगली सुनवाई 27 फरवरी तय कर दी। अब सबकी नजरें स्पीकर पर टिकी हैं कि क्या वे अगली सुनवाई से पहले कोई निर्णय लेते हैं या नहीं। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार ऐसे मामलों में 90 दिनों के भीतर फैसला होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अध्यक्ष सभी पक्षों को सुन रहे हैं और आने वाले 8 से 15 दिनों में निर्णय संभव है।
सिंघार ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि पार्टी उपचुनाव से डर रही है। उनके मुताबिक, “अगर बीना में उपचुनाव हुआ तो सीट कांग्रेस की झोली में जाएगी।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा अदालत में तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है। वहीं, इस पूरे मामले पर विधायक निर्मला सप्रे से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। इससे सियासी अटकलें और तेज हो गई हैं। बीना की राजनीति, हाईकोर्ट की सुनवाई और स्पीकर का फैसला—तीनों अब आमने-सामने हैं। 27 फरवरी को यह तय होगा कि यह मामला किस दिशा में जाता है, लेकिन फिलहाल गेंद स्पीकर के पाले में है।