पानी में तैरते चमकते और रंग बदलते पत्थरों को देख उत्सुक हुए छात्र, UTD की लाइब्रेरी भी देखी
पानी में तैरते हुए पत्थर और म्यूजियम में रखे अलग-अलग प्रकार के शैलों, अयस्कों और जीवाश्मों समेत दुर्लभ चीजों को देखकर कॉलेज के स्टूडेंट हैरान रह गए। सभी को इनके बारे में जाने की उत्सुकता हुई। साथ ही पानी में तैरता प्यूमिस पत्थर और प्रतिदीप्ति घटना के कारण चमकते और रंग बदलने वाले पत्थर, विद्यार्थियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। एमपी के छतरपुर स्थित महाराजा छत्रसाल विश्वविद्यालय के छात्र सागर स्थित डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के पुस्तकालय भी भ्रमण करने पहुंचे थे।
इस दौरान विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण जानकारी दी गयी। साथ ही प्रयोगशालाओं में मौजूद उपकरणों और उनके प्रयोग करने के तरीकों के बारे में विस्तार से भी बताया गया। दरअसल छतरपुर में महाराजा छत्रसाल बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय की भूगर्भशास्त्र अध्ययन शाला द्वारा एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण का आयोजन किया गया था। जो कुलगुरु राकेश कुशवाह के संरक्षण और कुलसचिव यशवंत सिंह पटेल के मार्गदर्शन में किया गया। एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण विभागाध्यक्ष प्रोफेसर पी.के जैन के निर्देशन और नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस दौरान विद्यार्थियों ने भीमकुंड पहुंचकर उससे जुड़े भूवैज्ञानिक तथ्यों को समझा।
वहीं बाजना और बक्सवाहा के बीच स्थित रोड कटाव में दिख रही भूवैज्ञानिक संरचनाओं से भी अवगत कराया गया। इसके बाद विद्यार्थी डाॅ हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय सागर स्थित व्यवहारिक भू-विज्ञान विभाग भ्रमण करने पहुंचे। जहां विद्यार्थियों को डब्ल्यू डी वेस्ट जियोलॉजिकल म्यूजियम, फोटो जियोलॉजी प्रयोगशाला, पेट्रोलाॅजी प्रयोगशाला, अयस्क प्रयोगशाला और सूक्ष्म जीवाश्म विज्ञान प्रयोगशाला का भ्रमण कराया गया। विभागाध्यक्ष प्रोफेसर ए.के सिंह ने व्याख्यान के माध्यम से विभाग के इतिहास, उन्नति और किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराते हुए, भूविज्ञान के क्षेत्र में विद्यार्थियों को कैरियर बनाने की संभावनाओं की भी जानकारी दी गई।
इस दौरान म्यूजियम में रखे कई प्रकार के शैलों, अयस्कों और जीवाश्मों के बारे में समझाया गया। जिसमें पानी में तैरता प्यूमिस पत्थर और प्रतिदीप्ति घटना के कारण चमकते और रंग बदलने पत्थर, विद्यार्थियों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। साथ ही विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं में मौजूद उपकरणों और उनके प्रयोग करने के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया गया। आखिर में छात्र जवाहरलाल नेहरू केन्द्रीय ग्रन्थालय भ्रमण करने पहुंचे थे। जहां उन्होंने ग्रन्थालय की कार्यप्रणाली को समझने के साथ-साथ वहां बड़ी संख्या में मौजूद अलग-अलग किताबों को देखा।--------