स्वच्छता में सबसे ज्यादा फिसड्डी फिर भी नहीं जागे जिम्मेदार, अभियान को लगा रहे पलीता
जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं मोहल्ले और कॉलोनियों में गंदगी का अंबार नज़र आ रहा है। बाज़ारों में भी यही आलम है। खुद कलेक्टर इस बात को कह चुके हैं की सफाई व्यवस्था में हम अंतिम पायदान पर आये हैं। जो भी खामियां और कमियां रह गयी है उन्हें पूरा किया जायेगा। स्वच्छता में अव्वल आने के सभी प्रयास किये जाएंगे। लेकिन दमोह से सामने आई ये तस्वीरें इसके उलट हैं। स्वच्छता में सबसे ज्यादा फिसड्डी होने के बावजूद भी जिम्मेदार लोग जागे नहीं हैं। तस्वीरें तो यही कह रही हैं।
जी हाँ बात दमोह नगर पालिका के अनोखे स्वच्छता अभियान की हो रही है। जहां स्वच्छता का क्या आलम है आप खुद ही देख सकते हैं। यह नज़ारा जिला प्रशासन और नगर पालिका प्रशासन की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान तो खड़े करते ही हैं। बल्कि जिम्मेदारों को सवालों के कटघरे में भी खड़ा करते हैं की वर्तमान में जिस प्रकार कॉलोनी, वार्ड मोहल्ले और बाजारों में गंदगी का अंबार लगा हुआ है। क्या उन पर अब भी जिम्मेदार कार्य कर रहे हैं या फिर दमोह को अस्वच्छता का तमगा मिलने के बाद औपचारिकता निभाकर रफा दफा कर देते हैं।
हद तो ये है की शिक्षा के मंदिर के पास ही गंदगी का अंबार लगा हुआ मिला। यह क्षेत्र मुख्य बाजार में आता है। जहां से हजारों लोगों का आना-जाना रहता है साथ ही पास में मंदिर भी मौजूद है। ऐसे में इस प्रकार की गंदगी होना शहर की स्वच्छता पर सवाल खड़े करता है। साथ ही उन जिम्मेदारों को भी जिम्मेदारी का एहसास दिलाता है और कमियों को आईना दिखाने का प्रयास करता है।
अब यह नजारा भी देखिये जो बीच शहर कीर्ति स्तंभ से टॉकीज चौराहे से सामने आया। जहां इस ट्रैक्टर में कचरा भरकर ले जाया जा रहा है। लेकिन इसे ढंका नहीं गया जिस वजह से सड़क पर ब्रेकर गड्ढों की वजह से कचरा बाहर गिर रहा है। ऐसे में स्वच्छता का महत्त्व ही क्या। जबकि पूर्व में प्रशासन ने कचरे को ढंककर ले जाने के आदेश भी जारी किये थे। लेकिन आदेश की किस प्रकार धज्जियां उड़ाई जा रही हैं साफ-तौर पर देखा जा सकता है। एक तरफ सफाई कर्मियों की मेहनत और दूसरी तरफ प्रशासन की ये लापरवाही।
अब देखना बड़ा दिलचस्प होता है की खबर दिखाए जाने के बाद जिम्मेदार अपने कार्य के प्रति कितना जागते हैं। या जो हालात हैं वह आगे भी जारी रहते हैं।