एमपी की अर्थव्यवस्था नई उड़ान पर, ₹16.94 लाख करोड़ GSDP, 11% ग्रोथ से विकास का डबल इंजन |
मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने इस बार नया इतिहास रच दिया है। राज्य की सकल घरेलू उत्पाद यानी GSDP बढ़कर ₹16.94 लाख करोड़ तक पहुंच गई है। आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक प्रदेश ने 11% की प्रभावशाली विकास दर दर्ज की है, जो देश के तेजी से आगे बढ़ते राज्यों में उसे मजबूती से खड़ा करती है। इस विकास का सीधा फायदा आम लोगों को भी मिला है। प्रति व्यक्ति आय बढ़कर ₹1,52,615 हो गई है। इसका मतलब है कि लोगों की जेब मजबूत हुई है और परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार देखने को मिल रहा है।
खेती के मोर्चे पर भी प्रदेश ने कमाल किया है। खाद्यान्न उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। कृषि क्षेत्र की ग्रोथ रेट करीब 16% तक पहुंची है। किसान अधिक उत्पादन कर रहे हैं और उनकी आमदनी में बढ़ोतरी हो रही है। शिक्षा के क्षेत्र में भी बड़ी उपलब्धि सामने आई है। कक्षा 1 से 5 तक ड्रॉपआउट दर लगभग शून्य हो गई है। यानी छोटे बच्चों का स्कूल छोड़ना लगभग खत्म हो चुका है। सरकार की नई शिक्षा नीतियों का असर जमीनी स्तर पर दिख रहा है।
पर्यटन में भी रिकॉर्ड बना है। साल 2024 में प्रदेश में 14 करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुंचे, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25% अधिक है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है। वित्तीय अनुशासन का भी सकारात्मक असर दिखा है। वर्ष 2025-26 के लिए ₹618 करोड़ का रेवेन्यू सरप्लस अनुमानित है। यानी सरकार की आय खर्च से अधिक है, जिससे विकास योजनाओं को निरंतर गति मिल रही है।
स्वास्थ्य और आवास के क्षेत्र में भी सुधार दर्ज किया गया है। मातृ मृत्यु दर में कमी आई है और गरीबों को बड़ी संख्या में पक्के मकान उपलब्ध कराए गए हैं। इसी मजबूत आर्थिक पृष्ठभूमि के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश करने जा रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि विकास की यह रफ्तार आने वाले सालों में किस नई ऊंचाई को छूती है।