सागर- कैंसर दर्द पर मंथन, आईएसए सागर की संगोष्ठी में पेलिएटिव केयर पर बड़ा संदेश
सागर में कैंसर पीड़ितों के दर्द प्रबंधन को लेकर एक अहम पहल देखने को मिली। Indian Medical Association (आईएमए) एवं Indian Society of Anaesthesiologists (आईएसए) सागर शाखा के संयुक्त तत्वावधान में बुंदेलखंड शासकीय मेडिकल कॉलेज में कैंसर दर्द प्रबंधन एवं हॉस्पिस केयर विषय पर एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम के प्रथम वक्ता डॉ. सुशील गौर ने कैंसर दर्द की गंभीरता और वैश्विक बोझ पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैंसर दर्द आज भी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है। आंकड़ों के अनुसार 50 प्रतिशत से अधिक कैंसर रोगी दर्द से जूझते हैं, जबकि उन्नत अवस्था में यह संख्या 70 से 90 प्रतिशत तक पहुंच जाती है। आधुनिक चिकित्सा में प्रगति के बावजूद दर्द अब भी मरीजों के लिए सबसे भयावह लक्षण बना हुआ है।
दूसरे मुख्य वक्ता डॉ. सर्वेश जैन ने बेसिक पेन मैनेजमेंट, पेलिएटिव केयर और हॉस्पिस केयर के बीच अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि पेलिएटिव केयर का उद्देश्य गंभीर बीमारी के साथ भी बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करना है, जबकि हॉस्पिस केयर तब लागू होती है जब इलाज की संभावनाएं समाप्त हो जाती हैं और रोगी को आराम देना प्राथमिकता बन जाता है। डॉ. जैन ने न्यूरोलाइटिक ब्लॉक्स जैसी उन्नत तकनीकों पर भी चर्चा की।
उन्होंने बताया कि यह न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया लंबे समय तक दर्द से राहत देती है, खासकर तब जब दवाएं प्रभावी नहीं रह जातीं। कैंसर दर्द प्रबंधन का मकसद सिर्फ दर्द कम करना नहीं, बल्कि मरीज को बेहतर नींद, संतुलित भोजन और सक्रिय जीवन देना है। आईएमए सागर के अध्यक्ष डॉ. तल्हा साद ने कहा कि संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से अंतिम चरण के मरीजों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में चिकित्सकों, विशेषज्ञों और मेडिकल छात्रों ने भाग लेकर सक्रिय चर्चा की।