आज़ाद भारत के गांव का ऐसा हाल,पीने का पानी नसीब नहीं,ये कैसा जल जीवन मिशन !
कई दशक बीत गए सरकारें तो बनी, नेता भी आये और चले गए। बड़े-बड़े दावे भी हुए। घोषणाएं भी हुई लेकिन बस उन पर कभी अमल ही नहीं हो सका। आज भी जब इस तरह की तस्वीरें दिखाई पड़ती हैं तो बरबस ही मन सोचने पर मजबूर हो जाता है की जो लाखों करोड़ों के काम होते हैं वह जमीनी स्तर पर क्यों नहीं उतरते। क्यों आज भी लोगों को पीने के पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। तमाम तरह के संसाधन होने के बावजूद भी क्यों ये आलम है। यह तस्वीरें एमपी के विदिशा जिले की हैं। जहां के लोग पेयजल संकट से जूझ रहे हैं।
दूर-दराज से लोगों को पीने का पानी लाना पड़ता है। जिला मुख्यालय से महज 15 किलोमीटर दूर स्थित बिलोरी गांव में पेयजल की समस्या है जो आज की नहीं बल्कि करीब ढाई दशक पुरानी है। विदिशा तहसील और शमशाबाद विधानसभा के अंतर्गत इस गांव में 3 साल पहले नल-जल योजना के तहत काम किया गया था। लेकिन आज तक लोगों को नल से पानी नसीब नहीं हुआ। हद तो ये है की लाखों रूपये खर्च करके बनाई गयी पानी की टंकी में क्रैक आने से वह जर्जर हो चुकी है।
विदिशा तहसील और शमशाबाद विधानसभा के अंतर्गत जिला मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर बिलोरी गांव में रहवासी पेयजल संकट के दौर से गुजर रहे हैं। ग्रामीणों की माने तो यह समस्या आज की नहीं बल्कि सालों पुरानी है। लोग पेयजल के लिए गांव से कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाने को मजबूर हैं। करीब 3 साल पहले यहां नल-जल योजना, जल जीवन मिशन के अंतर्गत लाई गई थी। घरों तक पाइपलाइन पहुंचाई गई। पानी के लिए टंकी भी बनाई गई। लेकिन उसमें पानी कभी आया ही नहीं। पानी की टंकी में कई जगहों पर दरार आ गई है। वह धंस भी चुकी है। वर्तमान स्थिति में उसमें किसी भी सूरत में पानी भर पाना संभव नहीं है। ग्रामीणों ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कई बार गुहार लगाई। लेकिन उनकी परेशानी अब तक हल नहीं हो सकी है।
इस मामले में कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महामंत्री सुभाष बोहत ने गंभीर आरोप लगाते हुए जल जीवन मिशन में करोड़ों रुपए का भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया। वहीं भाजपा सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए। वहीं भाजपा के जिला उपाध्यक्ष अरविंद श्रीवास्तव ने इसे गंभीर मानते हुए जल्द विधायक के साथ दौरा कर समस्या को हल करने की बात कही।
हालांकि इस पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। जिसमें पीएचई अधिकारी, जनपद सीईओ समेत जिला पंचायत अधिकारी कुछ भी बोलने से बच रह हैं।
देखने वाली बात होती है की जिम्मेदारों द्वारा कब तक इसकी सुध ल जाती है कब तक लोगों को पानी नसीब हो सकेगा।