ताप विद्युत केंद्र में उपलब्धि और जवाबदेही पर छिड़ी बहस, प्रबंधन पर गहराई सवाल
संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में वैगन ट्रिपलर की खराबी से कोयला अनलोडिंग रुकने और ट्रांजिट लॉस बढ़ने पर प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल उठे हैं। उमरिया जिले के बिरसिंहपुर में वैगन पलटने की समस्या से कोयला अनलोडिंग ठप होने के चलते प्लांट की परिचालन क्षमता और उत्पादन पर प्रभाव पड़ रहा है। अब इसकी उपलब्धि और जवाबदेही पर बहस छिड़ गयी है। जिस पर प्रबंधन से सीधे सवाल किये गए।
दरअसल उमरिया में निरीक्षण के दौरान संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में प्रबंध निदेशक (एमडी) मंजीत सिंह को मीडिया के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। उन्होंने 500 मेगावाट यूनिट में रोटर डैमेज के बावजूद 100 दिन तक संचालन को “राष्ट्रीय उपलब्धि” बताया। लेकिन अन्य मुद्दों पर उठे प्रश्न चर्चा का केंद्र बन गए।
हर्री टोला (अंबिकापुर मार्ग) के पास वैगन पलटने और अनलोडिंग के बाद वैगनों में कोयला बाकी पाए जाने के मामले में एमडी ने कहा कि अनलोडिंग के दौरान थोड़ा-बहुत कोयला चिपका रह जाना सामान्य है और इसे बड़ा नुकसान बताना अतिसंयोक्ति है। उन्होंने 0.8 प्रतिशत तक ट्रांजिट लॉस को नियमों के तहत स्वीकार्य बताया और नुकसान की भरपाई संबंधित पक्ष से कराने की बात कही। हालांकि, उनके जवाबों को कई लोगों ने संबंधितों के बचाव के रूप में देखा।
इसी दौरान चचाई में ₹6.50 प्रति टन और यहां ₹37 प्रति टन अनलोडिंग दर के अंतर पर भी सवाल उठे। एमडी ने साफ़ उत्तर देने से परहेज करते हुए मीडिया को ही दोनों स्थानों के कार्य-क्षेत्र का तुलनात्मक अध्ययन करने की सलाह दे दी। पूरे घटनाक्रम ने उपलब्धियों के दावों के साथ-साथ वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।