तलाक ले रहे थे पति-पत्नी, लेकिन ASI ने समझाया तो साथ रहने राजी हुए दंपत्ति, टूटने से बचा रिश्ता
कहते हैं की बिछड़ों को मिलाना सबसे बड़ा काम माना जाता है। कहा जाता है की तोड़ने से ज्यादा विश्वास जोड़ने में रखना चाहिए। एक ऐसा ही मामला भी सामने आया। जहां आपस में अनबन के चलते अलग-अलग रह रहे पति-पत्नी पुलिस की वजह से वापस एक दूजे के हो गए। इसमें सबसे बड़ा योगदान चौकी प्रभारी राकेश पाठक का रहा। हैरानी की बात ये है की दोनों में विवाद के बाद तलाक की नौबत आ पहुंची थी। लेकिन दमोह में चौकी प्रभारी ने दोनों की सुलह करा दी। खुद पुलिस इस बात की गवाह बनी और दोनों को ख़ुशी-ख़ुशी विदा भी किया गया। बैंड-बाजे के साथ पति-पत्नी ने एक दूसरे को वरमाला भी पहनाई। और राकेश पाठक से आशीर्वाद लिया। दमोह जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के बड़ापुरा में रहने वाले अहिरवार दंपत्ति ने एक नई ज़िंदगी की शुरुआत की है
जी हाँ ये कहानी बिलकुल सच्ची है। दमोह जिले से सामने आये इस मामले में जहां पुलिस ने मानवता की मिसाल पेश की चौकी प्रभारी ने न सिर्फ एक परिवार को टूटने से बचाया। बल्कि रिश्तों का मोल भी समझाया।
बताया जा रहा है की बड़ापुरा में रहने वाला प्रमोद अहिरवार की शादी दो साल पहले बटियागढ़ के गढ़ौला की रहने वाली युवती से शादी हुई थी। दोनों का एक बच्चा भी है। लेकिन दोनों पति-पत्नी में गलतफहमियों के चलते विवाद होने लगा। आपसी विश्वास की कमी के कारण बात थाने से लेकर न्यायालय तक जा पहुंची। मामला यहां तक पहुंच गया की पत्नी ने पति से तलाक लेने की बात कह दी। लेकिन कोतवाली थाना अंतर्गत चौकी प्रभारी राकेश पाठक ने पति-पत्नी और दोनों के परिजनों को बुलाया उन्हें काफी अच्छे से समझाइश दी गयी। शादी का महत्त्व बताया गया। दोनों के बीच आपसी सुलह कराई तो पति-पत्नी साथ में रहने को तैयार हो गए। जिसके बाद चौकी में ही दोनों ने एक दूसरे को वरमाला पहनाई और ख़ुशी-ख़ुशी वहां से लौट आये।
पुलिस के इस कार्य से एक परिवार ना सिर्फ टूटने से बल्कि पुलिस और न्यायालय के चक्कर काटने से भी बच गया। साथ ही एक परिवार को भी टूटने से बचा लिया।