बीहड़ों में बजी खुशियों की बांसुरी, चंबल में गंगा डॉल्फिन, घड़ियाल और इंडियन स्कीमर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी
कभी बागियों के लिए चर्चित रहा चंबल का बीहड़ इलाका आज पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य मुरैना में साल 2026 की जलीय जीव गणना के नतीजों ने वन विभाग और पर्यावरण प्रेमियों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक गंगा डॉल्फिन की संख्या 111 से बढ़कर 155 हो गई है। यानी रिकॉर्ड 44 की बढ़ोतरी। वहीं घड़ियाल की संख्या 2462 से बढ़कर 2938 पहुंच गई है, जो 476 की उल्लेखनीय बढ़त है।
इतना ही नहीं, मगरमच्छ की संख्या भी 1072 से बढ़कर 1512 हो गई है। वहीं दुर्लभ प्रवासी पक्षी इंडियन स्कीमर की संख्या 789 से बढ़कर 1055 दर्ज की गई है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमाओं में फैले इस अभयारण्य में यह ‘वाइल्डलाइफ बूम’ साफ संकेत देता है कि संरक्षण प्रयास सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि साफ जल, बेहतर मॉनिटरिंग और स्थानीय समुदाय के सहयोग से यह सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
वन विभाग की टीमों ने नाव के जरिए पूरे क्षेत्र में सघन गणना की, जिससे आंकड़े अधिक सटीक सामने आए। यह भी माना जा रहा है कि बीते वर्षों में अवैध शिकार पर सख्ती और नदी की स्वच्छता पर ध्यान देने से इकोसिस्टम मजबूत हुआ है। एसडीओ वन विभाग श्याम सिंह चौहान ने बताया कि यह सफलता निरंतर संरक्षण अभियान और टीमवर्क का परिणाम है। चंबल की यह तस्वीर बताती है कि अगर प्रयास ईमानदार हों तो प्रकृति खुद को फिर से संवार लेती है। बीहड़ों की धरती अब वन्यजीवों की सुरक्षित शरणस्थली बन चुकी है।