Sagar - गरीबों की दीवार तोड़ कर उमा ने रचा इतिहास किसान पिता के सपने को सच करने में की जान लगा दिया
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर सागर जिले की देवरी जनपद के ग्राम विचुआ भवतरा निवासी उमा दांगी की सफलता ने पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित कर दिया है। सीमित संसाधनों और आर्थिक अभावों के बीच पली-बढ़ी उमा ने संघर्ष और मेहनत के दम पर प्राथमिक शिक्षक पद पर चयनित होकर अपने सपनों को साकार कर दिखाया। उमा के पिता एक छोटे किसान हैं, जिनके पास लगभग दो एकड़ जमीन है और इसी खेती से परिवार का भरण-पोषण होता रहा। छह भाई-बहनों वाले परिवार में आर्थिक स्थिति हमेशा कमजोर रही, लेकिन माता-पिता ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं दी। अभावों के बीच पढ़ाई जारी रखना आसान नहीं था, फिर भी उमा ने हार नहीं मानी।
इसी दौरान सामाजिक संस्था “आस एक उम्मीद” ने उसका सहारा बनकर साथ दिया। संस्था ने छात्रा की पढ़ाई और अन्य जरूरी जरूरतों में लगातार सहयोग किया, जिससे उसका सपना साकार हो सका। इस प्रेरणादायक सफर में समाजसेवी संजय ब्रजपुरिया (अध्यक्ष, आस एक उम्मीद सामाजिक संस्था), बीकेपी कॉलेज के संचालक डॉ. अवनीश मिश्रा और अनिल ढिमोले का विशेष योगदान रहा। इन सभी ने समय-समय पर छात्रा को आर्थिक और शैक्षणिक सहयोग के साथ मार्गदर्शन भी दिया। उमा के चयन की खबर मिलते ही परिवार में खुशी का माहौल है।
माता-पिता की आंखों में गर्व के आंसू हैं, वहीं गांव और क्षेत्र के लोग भी बेटी की इस उपलब्धि पर खुशी जता रहे हैं। महिला दिवस के अवसर पर मिली यह सफलता समाज के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि यदि बेटियों को अवसर, सहयोग और सही मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता का परचम लहरा सकती हैं। उमा दांगी की यह कहानी संघर्ष, माता-पिता के त्याग और समाज के सहयोग की प्रेरक मिसाल बन गई है।