होली के बाद शुरू हुआ पलायन, रोजगार की कमी से परिवार छोड़ रहे गांव, सरकार से उठी बड़ी मांग
मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के धुलकोट क्षेत्र से हर साल बड़ी संख्या में मजदूरों के पलायन का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। होली के बाद जैसे ही खेती-किसानी का काम कम होता है, वैसे ही यहां के आदिवासी ग्रामीण परिवार रोजगार की तलाश में अन्य जिलों और राज्यों की ओर निकल पड़ते हैं। अब इस लगातार बढ़ते पलायन को रोकने की मांग तेज हो गई है।
धुलकोट और आसपास के आदिवासी अंचलों से सैकड़ों मजदूर परिवार हर साल गुजरात, महाराष्ट्र और अन्य शहरों की ओर पलायन करते हैं। ये लोग वहां ईंट-भट्टों, फैक्ट्रियों और खेतों में मजदूरी करने के लिए जाते हैं। मजबूरी में पूरा परिवार गांव छोड़कर बाहर जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है और परिवारों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय समाजसेवियों और ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण लोगों को पलायन करना पड़ता है। यदि गांवों के आसपास रोजगार के स्थायी अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो मजदूरों को अपने घर-परिवार से दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आदिवासी समाजसेवियों का कहना है कि सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। ग्रामीणों ने सांसद, विधायक और मुख्यमंत्री से मांग की है कि धुलकोट क्षेत्र में छोटे उद्योग, कृषि आधारित रोजगार और अन्य विकास योजनाओं को बढ़ावा दिया जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकें।
ग्रामीणों ने यह भी सुझाव दिया है कि मनरेगा जैसी योजनाओं के तहत अधिक से अधिक कार्य शुरू किए जाएं। यदि गांव में ही रोजगार मिलेगा तो लोगों को बाहर जाने की मजबूरी नहीं होगी और बच्चों की पढ़ाई तथा परिवार का जीवन भी बेहतर हो सकेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर सरकार और जनप्रतिनिधि इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान दें तो धुलकोट क्षेत्र से होने वाले मजदूरों के पलायन को काफी हद तक रोका जा सकता है। इससे न केवल ग्रामीणों को अपने गांव में ही सम्मानजनक रोजगार मिलेगा, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी।