Sagar- करीला धाम मेले में बधाई नृत्य, नर्तकियों ने दिनभर दी प्रस्तुति
रंगपंचमी के पर्व पर सागर के राजीव नगर वार्ड में स्थित श्रीराम जानकी मंदिर में करीला धाम की तर्ज पर मेले का आयोजन किया गया। मेले में लोक कलाकारों ने राई और बधाई नृत्य की प्रस्तुतियां दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शहर समेत आसपास ग्रामों के लोग पहुंचे। जहां उन्होंने माता जानकी के दर्शन किए और एक-दूसरे को रंगपंचमी पर्व की बधाइयां दी। बुंदेलखंड में लोक नृत्य की परंपरा काफी प्राचीन है। रंगपंचमी पर आयोजित इस तरह के कार्यक्रम से लोक संस्कृति को बढ़ावा मिलता है
मान्यता है कि जब भगवान श्रीराम ने माता सीता का परित्याग कर दिया था और वन में माता ने लव-कुश को जन्म दिया था, वह जगह करीला धाम ही है. लेकिन, माता को जब सोच हुआ कि अगर वह अयोध्या में होती तो उनके बच्चों का जन्म उत्सव धूमधाम से मनाया जाता, तब ऋषि वाल्मीकि जी ने मां के मन की बात जान ली. स्वर्ग से अप्सराओं का आह्वान किया. तब इंद्र की सभा में नृत्य करने वाली अप्सराएं धरती पर आईं और लव-कुश के जन्म उत्सव पर रात भर बधाई की. जब सुबह माता से विदाई मांगने लगीं तो उनके पास ज्यादा कुछ नहीं था, तब अप्सराओं ने वरदान मांगा था कि जब तक पृथ्वी रहे तब तक उनका यह नृत्य होता रहे, इसलिए आज भी रंग पंचमी पर त्रेता युग से जो परंपरा शुरू हुई थी