मुकेश मल्होत्रा की विधायकी रद्द होने पर सियासत तेज, उमंग सिंघार बोले जनादेश का सम्मान जरूरी
मध्यप्रदेश की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी शून्य होने के मामले पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का बड़ा बयान सामने आया। उन्होंने इस पूरे मामले को लोकतंत्र और जनादेश से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतदाता का मत सर्वोपरि होता है और जनता के फैसले का सम्मान होना चाहिए। उमंग सिंघार ने कहा कि मुकेश मल्होत्रा को जनता ने अपना प्रतिनिधि चुनकर विधानसभा भेजा था, ऐसे में उनकी विधायकी शून्य होना दुर्भाग्यपूर्ण है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे हाईकोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हैं, लेकिन इस मामले को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं।
सिंघार ने उदाहरण देते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने नामांकन पत्र में वैवाहिक जीवन की जानकारी नहीं दी थी। इसी तरह महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मामले में भी नामांकन से जुड़ी जानकारियों को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन उन मामलों में अदालत के फैसले अलग रहे। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में क्या परिस्थितियां थीं, यह सबको पता है और उन्हें लगता है कि इस मामले में कोर्ट पर दबाव भी बनाया गया होगा। नेता प्रतिपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को राज्यसभा चुनाव में सीट हारने की चिंता सता रही है, इसी वजह से इस तरह के फैसले सामने आ रहे हैं।
वहीं बढ़ती महंगाई और गैस सिलेंडर के दामों को लेकर भी उमंग सिंघार ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार तेल कंपनियों को फायदा पहुंचाने का काम कर रही है, जबकि आम जनता महंगाई से परेशान है। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जब पेट्रोल और डीजल सस्ते होते हैं, तब भी देश में इनके दाम कम नहीं किए जाते।
सिंघार ने कहा कि वर्तमान में युद्ध जैसी स्थिति के बीच घरेलू गैस सिलेंडर पर 60 रुपये की बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकार चाहे तो टैक्स कम कर आम जनता को राहत दे सकती है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा। इसके अलावा आदिवासी कोर्ट के मुद्दे पर भी उन्होंने कहा कि आदिवासी इस देश के मूल निवासी हैं। जब अलग-अलग समुदायों के लिए अलग कानून और व्यवस्था हो सकती है, तो आदिवासियों के लिए अलग कोर्ट बनाने में भी किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।